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कोरोना से प्रेग्नेंट महिलाओं को कितना और कैसा है खतरा, जानिए क्या रखनी होंगी सावधानियां

पढ़िए दैनिक भास्कर की ये खबर…

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में प्रेग्नेंट महिलाओं के बीच भी इन्फेक्शन बढ़ा है। इस वजह से कई तरह की बातें हो रही हैं। कहा जा रहा है कि आम महिलाओं के मुकाबले प्रेग्नेंट महिलाओं में कोरोना इन्फेक्शन होने का खतरा ज्यादा है। हमने प्रेग्नेंट महिलाओं के सामने आने वाली परेशानियों को लेकर डॉ. दिव्या, गायनेकोलॉजिस्ट, सीनियर रेजिडेंट, राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस रांची (RIMS), से बात की। आइए, जानते हैं कि प्रेग्नेंट महिलाओं को किस तरह की सावधानी रखनी चाहिए-

क्या प्रेग्नेंट महिलाओं में कोरोना होने की आशंका आम महिलाओं के मुकाबले ज्यादा है?

सोशल मीडिया पर इस तरह की बातें शेयर हो रही हैं कि प्रेग्नेंट महिलाओं में कोरोना होने का खतरा अधिक है। इसे लेकर अमेरिका की कुछ एजेंसियों ने रिसर्च किया है। इसके नतीजे बताते हैं कि जितना खतरा नॉर्मल महिलाओं को है, उतना ही खतरा प्रेग्नेंट महिलाओं को है। इन्फेक्शन रेट दोनों में बराबर है, लेकिन प्रेग्नेंट महिलाओं में इन्फेक्शन के गंभीर होने का खतरा अधिक होता है। इसकी वजह ये है कि प्रेग्नेंसी के दौरान उनके शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। उनकी इम्युनिटी भी थोड़ी कमजोर होती है।

प्रेग्नेंट महिला को कोविड से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

  • घर से बाहर भीड़ में जाने से बचें।
  • किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें।
  • जब तक बहुत जरूरी न हो, अस्पताल जाने से भी बचें।
  • अपने पास ऑक्सीमीटर, पल्स मीटर और थर्मामीटर रखें। मॉनिटरिंग करते रहें।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले रेगुलर चेकअप्स और टेस्ट जरूर करवाएं।
  • डॉक्टर की सलाह के बाद अपने पास सर्दी और बुखार की कुछ दवाइयां रखें।
  • समय-समय पर किसी गाइनेकोलॉजिस्ट से फोन पर कंसल्ट करते रहें।
  • हाइपरटेंशन, डायबिटीज, सांस लेने की बीमारी है तो विशेष सावधानी बरतें।
  • प्रॉपर डाइट लें, रेगुलर योग और वॉकिंग करें।

क्या कोरोना पॉजिटिव प्रेग्नेंट महिलाओं में प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा ज्यादा है?

  • इसको लेकर अभी कुछ ही स्टडीज हुई हैं। हालांकि कोविड पॉजिटिव प्रेग्नेंट महिला को आम महिला के मुकाबले ज्यादा दिक्कत होती है। एक साल में जो केस सामने आए हैं, उनमें 25 से 30% महिलाओं में प्रीमैच्योर डिलीवरी देखने को मिली है। वहीं सिम्प्टोमेटिक कोविड के केस में रिस्क फैक्टर दो से तीन गुना ज्यादा होता है। इसके साथ ही जिन महिलाओं को पहले से ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की प्रॉब्लम होती है, उनमें कोविड होने पर प्रीमैच्योर डिलीवरी के चांस और ज्यादा बढ़ जाते हैं।

प्रेग्नेंसी में कोरोना वैक्सीन लगवा सकते हैं या नहीं, इसके जवाब में अमेरिका के सीडीसी का कहना है कि लगवा सकते हैं। अगर आप वैक्सीन का एक डोज लेने के बाद प्रेग्नेंट होती हैं तो भी दूसरा डोज ले सकती हैं। वैक्सीन की वजह से बांझपन का कोई मामला सामने नहीं आया है।

कोविड पॉजिटिव प्रेग्नेंट महिलाओं को कौन-कौन सी सावधानियां अपनानी चाहिए?

  • सबसे पहले अपने आपको एक रूम में आइसोलेट कर लें। जरूरत के सामान अलग रख लें।
  • लक्षण माइल्ड हैं तो कोशिश करनी चाहिए कि घर पर रहकर ही इलाज कराएं।
  • बहुत जरूरी होने पर ही अस्पताल जाना चाहिए।
  • प्रॉपर डाइट, डॉक्टर की रेगुलर सलाह और दवाइयां लें।
  • सुबह शाम पल्स रेट और टेम्परेचर मॉनिटर करते रहें।
  • अपने कमरे में टहलें। हमेशा बेड पर लेटे रहना ठीक नहीं है।
  • अगर किसी तरह की दिक्कत हो, हाई फीवर हो या पहले से ब्लड प्रेशर या डायबिटीज हों तो किसी डॉक्टर की सलाह के अनुसार काम करें।

क्या प्रेग्नेंट महिलाओं को वैक्सीन लगवानी चाहिए?

  • कई लोग ऐसा कहते हैं कि प्रेग्नेंट महिलाओं को वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए। रूबेला जैसी वैक्सीन प्रेग्नेंट महिलाओं को नहीं लगती है, लेकिन कोविड वैक्सीन को लेकर किसी तरह के साइड इफेक्ट या नुकसान की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। अभी हाल ही में Centers for Disease Control and Prevention (CDC) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रेग्नेंट महिलाओं में वैक्सीन लगवाने से किसी तरह के साइड इफेक्ट नहीं हुए हैं। यानी रिस्क फैक्टर के मुकाबले बेनिफिट ज्यादा है। इसलिए वैक्सीन लगवानी चाहिए।
  • हां, अगर मन में कोई शंका हो तो पहले तीन महीने के दौरान इसे अवॉयड किया जा सकता है, क्योंकि तब तक बच्चे के ज्यादातर पार्ट्स डेवलप हो गए होते हैं। ऐसे में रिस्क फैक्टर कम होता है।

क्या पीरियड में वैक्सीन लेनी चाहिए? इम्युनिटी या फर्टिलिटी पर तो असर नहीं होगा?

  • बिल्कुल वैक्सीन लेनी चाहिए। पीरियड के दौरान वैक्सीन लेने से किसी तरह के साइड इफेक्ट अभी तक सामने नहीं आए हैं। ये कहना कि इससे इम्युनिटी कमजोर होती है या इनफर्टिलिटी बढ़ती है, साइंटिफिक नहीं है। इस तरह के दावों का कोई आधार नहीं है। साभार-दैनिक भास्कर
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