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भास्कर डेटा स्टोरी:नंबर घटे मुश्किलें नहीं; 5 दिन से नहीं बढ़े केस, पॉजिटिविटी रेट भी घटा, क्या ये है दूसरी लहर के पीक का संकेत?

पढ़िए  दैनिक भास्कर की ये खबर

देश में पिछले कुछ दिनों से कोरोना के मामले घट रहे हैं। लगातार घटते मामले इस ओर संकेत दे रहे हैं कि शायद देश में कोरोना की दूसरी लहर का पीक आ चुका है या फिर अगले कुछ दिन में आने वाला है। हालांकि कोरोना की दूसरी लहर खत्म होने वाली है, ये कहना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि कई ऐसे राज्य हैं जहां कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इनमें वो राज्य शामिल हैं जहां हाल ही में चुनाव संपन्न हुए हैं।

छह मई को देश में 4.14 लाख नए मामले सामने आए। इसके बाद से रोज आने वाले नए मामले लगातार घट रहे हैं। हालांकि 30 अप्रैल को देश में पहली बार 4 लाख से ज्यादा केस आने के बाद भी नए केसेज की संख्या में गिरावट आई थी, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब 7 दिन के औसत पर रोज आने वाले नए केसेज की संख्या में गिरावट देखी जा रही है। सात दिन के औसत पर रोज आने वाले केस लेने पर दिन विशेष में केस में होने वाली कमी या उछाल एडजस्ट हो जाता है। सात दिन के औसत के हिसाब से देखें तो 8 मई को सबसे ज्यादा 3.92 लाख नए केस आए। उसके बाद से ये लगातार घट रहे हैं।

एक्टिव केसेज में भी हो रही है लगातार कमी

पिछले दो महीने में पहली बार सोमवार को नए केस से ज्यादा रिकवर हुए मामले सामने आए। यानी, दो महीने बाद एक्टिव केसेज बढ़ने की जगह घटे। अप्रैल के अंत में हर रोज एक लाख एक्टिव केस बढ़ रहे थे। मई में ये तेजी से घटे हैं। यहां तक कि अब रोज एक्टिव केस के आंकड़े में 10 हजार से भी कम की बढ़त हो रही है। रविवार को एक्टिव केस का जो आंकड़ा 37 लाख को पार कर गया था, अब उसमें भी गिरावट शुरू हो गई है।

जिस तेजी से केस घटे, उस तेजी से नहीं कम हुई टेस्टिंग

रोज आने वाले नए केसेज की संख्या जब गिरनी शुरू हुई तो कहा गया कि टेस्टिंग घटने की वजह से ऐसा हो रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से रोज 18 लाख के आसपास टेस्टिंग हो रही है। इसके बाद भी रोज आने वाले केसेज में गिरावट देखी जा रही है।

पॉजिटिविटी रेट भी घटना शुरू हुआ

कोरोना की दूसरी लहर में जिस बात की सबसे ज्यादा चर्चा रही, वो है पॉजिटिविटी रेट। यानी, जितने टेस्ट हो रहे हैं, उनमें से कितने फीसदी टेस्ट पॉजिटिव आ रहे हैं। कोरोना की पहली लहर में ये पॉजिटिविटी रेट हमेशा 5% और 6% के बीच बना रहा, लेकिन दूसरी लहर के दौरान ये लगातार बढ़ता रहा। यहां तक कि ये बढ़कर 20% को भी पार कर गया। कुछ राज्यों में तो ये 40% को भी पार कर गया है।

पॉजिटिविटी रेट ये पता चलता है कि अगर टेस्ट बढ़ाए गए तो संक्रमण के मामले और बड़े स्तर पर आ सकते हैं। पॉजिटिविटी रेट ज्यादा होना इस ओर भी संकेत देता है कि संक्रमण के फैलने की दर बहुत ज्यादा है।

पूरे अप्रैल महीने में ये बढ़ता रहा। मई के पहले हफ्ते में पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 22.7% तक पहुंच गया था। इसके बाद इसमें गिरावट शुरू हुई है। अब ये गिरकर 20.1% पर आ गया है।

जिन राज्यों में सबसे ज्यादा केस, वहां भी रोज आने वाले नए मामले घटे

देश में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में हैं। एक वक्त रोज आने वाले नए केस में 60% अकेले महाराष्ट्र से आ रहे थे। अब यहां आने वाले मामले लगातार घट रहे हैं। पिछले तीन हफ्ते से राज्य में नए केस आने कम हुए हैं। एक वक्त जहां एक ही दिन में महाराष्ट्र में 68 हजार से ज्यादा मामले आए थे। वहां दो हफ्ते पहले 60 हजार से कम केस आने लगे थे। तो 9 मई से 50 हजार से भी कम केस आ रहे हैं।

कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में भी पिछले एक हफ्ते से रोज आने वाले नए केस घटे हैं। हालांकि सबसे संक्रमित पांच राज्यों में शामिल केरल और तमिलनाडु के साथ ऐसा नहीं कहा जा सकता है। ये दोनों राज्य ही उन राज्यों में शामिल हैं, जहां हाल ही में चुनाव संपन्न हुए हैं।

ऐसा लगता है कि महाराष्ट्र की तरह दिल्ली में भी पीक आ चुका है। यहां भी रोज आने वाले औसत केस अप्रैल के अंत में 25 हजार को पार कर गए थे, लेकिन अब वो घटकर 14 हजार के पास आ चुके हैं। यहां तक कि 13 मई को तो सिर्फ 10,489 नए केस ही सामने आए।

चुनावी राज्यों में हालात अभी भी खराब

जिन पांच राज्यों में 2 मई को विधानसभा चुनाव संपन्न हुए। उन सभी राज्यों में रोज आने वाले नए केस लगातार बढ़ रहे हैं। इन राज्यों में अगर इसी तरह लगातार केस बढ़ते रहे तो दूसरी लहर का अंत और आगे बढ़ सकता है। पांच राज्यों में से सिर्फ केरल ऐसा है जहां पिछले कुछ दिन से नए केसेज में बढ़त रुकी है। हालांकि केस कम होने यहां भी शुरू नहीं हुए हैं।

आंकड़े भले राहत दे रहे, पर अभी भी सतर्क रहने की जरूरत

दूसरी लहर को लेकर ऊपर जितने भी संकेत है, वो भले राहत देने वाले हैं, लेकिन ये लहर अभी खत्म नहीं हुई है। इसे खत्म होने में अभी काफी समय है। हमारी-आपकी जरा सी लापरवाही इसे फिर से बढ़ा सकती है। वहीं, पहली लहर में 98 हजार रोज के मामलों से 10 हजार रोज के मामले आने में 5 महीने लगे थे। ऐसे में इस वक्त जिस तरह मामले आ रहे हैं, उसे फिर से उस स्तर तक आने में और ज्यादा वक्त लग सकता है। साभार-दैनिक भास्कर

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