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नर्स, हेल्थ वर्कर होंगे नोडल पर्सन: ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के लिए नई गाइडलाइन्स जारी

पढ़िए  एनडीटीवी इण्डिया की ये खबर

गाइडलाइन्स के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में कम्यूनिटी हेल्थ अफसर या ANM,मल्टी पर्पस हेल्थ वर्कर (पुरुष) नोडल पर्सन होंगे और उन्हें आशा कार्यकर्ता सहयोग करेंगी. नए SOP में नोडल पर्सन्स को रैपिड एंटीजन टेस्टिंग समेत कई तरह की ट्रेनिंग देने की बात कही गई है.

नई दिल्ली: ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैलते कोरोना वायरस ( Coronavirus) संक्रमण के चलते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Health Ministry)  ने अब अर्ध-शहरी, ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के लिए अलग से नई गाइडलाइन्स जारी की है. नई गाइडलाइन्स में ग्रामीण इलाकों में ILI (INFLUNZA LIKE ILNESS) और SARI (SEVERE RESPIRATORY INFECTION) के मरीजों की निगरानी पर जोर दिया गया है.

गाइडलाइन्स के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में कम्यूनिटी हेल्थ अफसर या ANM,मल्टी पर्पस हेल्थ वर्कर (पुरुष) नोडल पर्सन होंगे और उन्हें आशा कार्यकर्ता सहयोग करेंगी. नए SOP में नोडल पर्सन्स को रैपिड एंटीजन टेस्टिंग समेत कई तरह की ट्रेनिंग देने की बात कही गई है.

नई गाइडलाइन्स की प्रमुख बातें: 

-आशा वर्कर्स और विलेज हेल्थ सेंटिटेशन एंड न्यूट्रिशन कमेटी की मदद से निगरानी की जाएगी.

-कोरोना के संदिग्ध मरीजों की रैपिड एंटीजन या आरटीपीएस के ज़रिए टेस्टिंग की जाय.

-कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की मदद से लक्षण वाले मरीजों को टेली कंसलटेशन मुहैया करवाया जाए.

-Comorbidity और लो सेचुरेशन वाले मरीजों को इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा जाए.

-कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर और ANM को रैपिड एंटीजन टेस्टिंग की ट्रेनिंग दी जाय.

-ग्रामीण क्षेत्रो में ऑक्सीजन सेचुरेशन को आंकने के लिए प्लस ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाय.

-आइसोलेशन और कोरन्टीन में मरीजों के फॉलोअप के लिए फ्रंटलाइन वर्कर,वालंटियर,शिक्षक घर घर जाएं.

-इन सबको होम आइसोलेशन किट मुहैया कराई जाए.

-होम आइसोलेशन में मरीज अगर सांस में तकलीफ हो,ऑक्सीजन 94 % से नीचे हो,सीने में दर्द हो तो वो लोग डॉक्टरों से संपर्क करें.

-ऑक्सीजन सेचुरेशन 94% से नीचे हो तो ऑक्सीजन बेड दिया जाय.

-होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों का 10 दिन में आइसोलेशन खत्म हो जाएगा और बिना लक्षण वाले मरीज की टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव हो और लग़ातर 3 दिन बुखार न हो तो 10 दिन में होम आइसोलेशन खत्म हो जाएगा.

-ग्रामीण इलाकों में कोविड केयर सेंटर माइल्ड और बिना लक्षण वाले मरीजों के लिए डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर,मॉडरेट केस के लिए और सीवियर केस वाले मरीजों के लिए डेडिकेटेड कोविड अस्पताल इलाज की जरूरत. वहां 30 बेड का इंतजाम हो.

-ये कोविड केयर सेंटर प्राइमरी हेल्थ सेंटर,कम्युनिटी हेल्थ सेंटर की निगरानी में कोविड केयर सेंटर,स्कूल,कम्युनिटी हॉल,मैरिज हॉल,पंचायत बिल्डिंग में बनाएं जाएं.

-एक बेड से दूसरे बेड की दूरी एक मीटर हो, प्रॉपर वेंटिलेशन हो.

-इस कोविड केयर सेंटर के पास बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेस हो जसमें पर्याप्त ऑक्सीजन हो और ये 24 घन्टे की सुविधा हो.

-अगर यहां पर मरीज माइल्ड से मॉडरेट या सीवियर हो तो उसे हायर सेंटर में भेजा जाए.

डेडिकेटेड कोविड हेल्थ केयर सेंटर

30 बेड का इंतजाम मॉडरेट मरीजों के लिए जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन 90 से 94 के बीच हो. हर बेड के साथ ऑक्सीजन उपलब्ध हो. डेडिकेटेड कोविड केयर हेल्थ सेंटर के तौर पर प्राइवेट हॉस्पिटल हो सकते हैं.

डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल

जिले के किसी अस्पताल या प्राइवेट हॉस्पिटल या उनके एक ब्लॉक को डेडिकेटेड हॉस्पिटल में कन्वर्ट किया जा सकता है.

Tribal एरिया में मोबाइल मेडिकल यूनिट का इंतजाम हो जिसमे मेडिकल ऑफिसर,फार्मासिस्ट,स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन हो. इनके पास रैपिड इंटिकट किट हो, RTPCR सैम्पल लेने की सुविधा हो. माइल्ड केस का इलाज कर सकें और ये डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर और डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल से इन्हें जोड़ा जा सके.  गाइडलाइन्स के मुताबिक इन जगहों पर एनजीओ की मदद ली सकती है. साभार-एनडीटीवी इण्डिया

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