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कोरोना महामारी महिलाओं को दे रही है दिल की बीमारियां; जानिए आपके लिए दिल की सेहत पर ध्यान देना क्यों जरूरी

पढ़िए  दैनिक भास्कर की ये खबर

कोरोना ने सभी को कहीं न कहीं प्रभावित किया है और कर भी रहा है। दुनियाभर की सरकारें, डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस महामारी पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। पर इससे सबसे अधिक नुकसान पहुंच रहा है महिलाओं को। उनमें दिल के रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। कई मामलों में तो पोस्ट-कोविड रिकवरी में भी महिलाएं दिल की बीमारियों की वजह से परेशानियों का सामना कर रही हैं।

इस माहौल में गर्भवती या नवजात शिशुओं का पालन-पोषण कर रहीं महिलाओं में बेचैनी और तनाव कई गुना बढ़ गया है। ऐसे में उनका सेहतमंद और सुरक्षित रहना ज्यादा अहम हो गया है। महिलाओं को हो रही दिल की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हमने मैक्स हॉस्पिटल, देहरादून में प्रमुख कंसल्टेंट और कार्डियोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. प्रीति शर्मा से बातचीत की। आइए जानते हैं कि वह क्या कहती हैं-

क्या कोविड-19 ने महिलाओं के लिए दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाया है?

हां। वैसे तो माना जाता है कि दिल की बीमारियों से पुरुषों को अधिक और महिलाओं को कम नुकसान है। इसी वजह से अक्सर महिलाओं की कार्डियोवस्कुलर बीमारियों के लिए जांच ही नहीं हो पाती। पर सच तो यह है कि महिलाओं की मौतों की एक बड़ी वजह दिल की बीमारियां हैं। पोस्ट-कोविड रिकवरी के करीब 10-15% मामलों में हमने महिलाओं में भी दिल की बीमारियों को बढ़ते देखा है। महिलाओं को होने वाले हार्ट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में उनकी सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

क्या कोविड-19 की वजह से हुए तनाव का भी प्रभाव पड़ रहा है?
हां, निश्चित तौर पर। कोविड-19 महामारी की वजह से महिलाओं पर कई तरह का तनाव पड़ रहा है। इसका असर उनके दिल की सेहत पर नकारात्मक हो रहा है। यह बात कई अध्ययनों में भी साबित हो चुकी है। चुनौतीपूर्ण माहौल में सामाजिक तनाव या तनाव वाली घटनाओं से भावनात्मक रूप से निपटने में कठिनाई से महिलाओं को दिल की बीमारी होने का खतरा अधिक ही रहता है। ऐसे में उनके लिए अपने दिल की सेहत पर ध्यान देना बेहद महत्वपूर्ण है।

तनाव किस तरह से नई मां की सेहत खराब कर सकता है?
वैसे तो महिलाओं पर रोजमर्रा के कामकाज का तनाव ज्यादा ही होता है। कई मर्तबा थके होने के बाद भी उन्हें काम करना ही होता है। इस तनाव पर किसी का ध्यान नहीं जाता और यह उनके दिल सहित अन्य अंगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। गर्भधारण के बाद जिंदगी में होने वाले बदलाव, फिर से नौकरी शुरू करने और डेडलाइंस, घर का नियमित कामकाज और कई बातें उनका तनाव बढ़ा सकती हैं।

पर यह तनाव नई मां की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। उन्हें कोविड-19 से इन्फेक्ट होने की चिंता नहीं करनी चाहिए। अक्सर यह चिंता ही उन्हें तनावग्रस्त बना सकती है। तनाव मां के स्वास्थ्य और बच्चे को बेस्ट पॉसिबल केयर देने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

साभार-दैनिक भास्कर

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