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Covid death in Ghaziabad: पिछले साल के मुकाबले मई में 10 गुना ज्यादा मौतें, आधिकारिक आंकड़ों से अलग डेथ सर्टिफिकेट बयां कर रहे हकीकत

पढ़िये  नवभारत टाइम्स की ये खबर….

बता दें कि गाजियाबाद में अप्रैल और मई 2021 में कोरोना संक्रमण का फैलाव बहुत ज्यादा था और इसे दूसरी लहर का पीक माना जा रहा था। श्मशान घाटों में शवों को जलाने के लिए लंबी

गाजियाबाद। कोरोना संक्रमण के चलते गाजियाबाद में प्रशासनिक स्तर पर 6 जून तक 451 मौतों की पुष्टि की गई। जिले में 31 मई तक 11817 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। हालांकि अभी भी सैकड़ों मृत्यु प्रमाण पत्र संबंधित निकायों में लंबित हैं। केवल मई में पिछले साल के मुकाबले इस साल लगभग 10 गुना ज्यादा मौत हुई हैं। मई 2020 में जिले में 477 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, जबकि मई 2021 में यह आंकड़ा 5422 है।

कोरोना संक्रमण के फैलाव के बाद से जिले में मृत्यु दर में भी तेजी से इजाफा हुआ। आंकड़ों पर गौर करें तो बीते साल मार्च में 1124 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। अप्रैल 2020 में यह आंकड़ा घटा और 501 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। मई 2020 में जिले के सभी निकायों से 477 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए थे।

जनवरी में 1890 डेथ सर्टिफिकेट हुए जारी
वर्ष 2021 में जनवरी से ही मृत्युदर में वृद्धि दर्ज की गई। जनवरी 2021 में जिले में 1890 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए, फरवरी 2021 में 1661, मार्च 2021 में 1396, अप्रैल 2021 में 1448 और मई 2021 में 5422 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। वर्ष 2020 में पूरे साल भर में 18701 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, जबकि वर्ष 2021 में मई तक ही 11817 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।

सैकड़ों लोग हरिद्वार ले गए शव
बता दें कि जिले में अप्रैल और मई 2021 में कोरोना संक्रमण का फैलाव बहुत ज्यादा था और इसे दूसरी लहर का पीक माना जा रहा था। श्मशान घाटों में शवों को जलाने के लिए लंबी लाइनें लगी हुई थीं। जिले के श्मशान में जगह नहीं मिलने पर सैकड़ों लोग शवों को गढ़ और हरिद्वार तक भी ले गए और वहां अंतिम संस्कार किया।

कई गुना ज्यादा मौतें
सरकारी स्तर पर वर्ष 2021 में जनवरी से मई तक कोरोना से 340 मौतों की पुष्टि की गई है। वर्ष 2020 में प्रशासनिक स्तर पर 102 मौतों की पुष्टि की गई थी। प्रशासनिक स्तर पर वर्ष 2020 और 21 में कोरोना संक्रमितों की 442 मौतों की पुष्टि की गई है। जबकि जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्रों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा है।

श्मशान में अलग है व्यवस्था
जिले के शहरी क्षेत्र में बने श्मशान घाटों पर कोरोना संक्रमितों के शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी के कंधों पर है। श्मशान घाटों पर इससे पहले तक पहुंचने वाले सभी शवों के अंतिम संस्कार की ब्योरा श्मशान घाट की कमिटी के रजिस्टर में दर्ज किया जाता था, लेकिन वर्ष 2020 जुलाई से कोरोना संक्रमितों के शवों के अंतिम संस्कार का ब्योरा श्मशान घाट कमिटी के रजिस्टर में दर्ज करने से रोक दिया गया। नगर निगम यह डेटा दर्ज कर रहा है और इसे गुप्त भी रख रहा है।  साभार-नवभारत टाइम्स

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