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UP में हिंदू से मुस्लिम बने आदित्य के सवाल:मां से पूछा- हिंदू कई देवी-देवताओं की पूजा क्यों करते हैं, एक से ज्यादा शादी मंजूर क्यों नहीं; मां बोली- मौलानाओं ने ब्रेनवॉश कर दिया

पढ़िए दैनिक भास्कर की ये खबर…

हिंदू से मुसलमान बने आदित्य (पीली टी-शर्ट में)। हालांकि अब उसकी घर वापसी हो गई है।

कानपुर में हिंदू से मुस्लिम बने मूक-बधिर आदित्य के माता-पिता के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। आदित्य अपने घर लौट आया है, लेकिन मौलानाओं ने आदित्य का इस कदर ब्रेनवॉश कर दिया है कि वह अपने आगे किसी की नहीं सुन रहा। वह अब अपने ही माता-पिता से तर्क करते हुए कह रहा है कि इस्लाम सबसे बेहतर धर्म है।

आदित्य की मां ज्योति बताती हैं कि मौलानाओं ने बेटे के जेहन में हिंदुओं को लेकर इतनी नफरत भर दी है कि उसे आसानी से निकाल पाना मुश्किल है। यहां तक कि उसे ये भी बताया गया है कि दुनिया का सबसे पुराना धर्म सनातन (हिंदू) नहीं बल्कि इस्लाम है। ज्योति ने ‘दैनिक भास्कर’ से उन 7 सवालों को साझा किया, जिसके लिए आदित्य घर वालों से ही लड़ने को तैयार है…

इन 7 सवालों का जवाब मांग रहा आदित्य

1- हिंदू धर्म में तमाम देवी देवताओं को पूजा जाता है, जबकि इस्लाम में केवल एक अल्लाह को?

2- सबसे पुराना धर्म हिंदू नहीं बल्कि इस्लाम है?

3- हिंदू धार्मिक पुस्तकों और ग्रंथों में नियम स्पष्ट नहीं है, जबकि कुरान में सब कुछ शीशे की तरह साफ है?

4- हिंदू धर्म मे मांसाहार वर्जित क्यों है, जबकि अल्लाह मांसाहार को अच्छा मानते हैं?

5- हिंदू धर्म में एक शादी की ही इजाजत क्यों हैं, जबकि इस्लाम में अल्लाह ने कई शादियों की इजाजत दी है?

6- हिंदू धर्म में शव को जलाया क्यों जाता है, जबकि शव को दफनाया जाना सही है जो कि इस्लाम में होता है ताकि कोई भय न हो?

7- हिंदू धर्म में स्त्री और पुरुषों का पहनावा गलत है? जबकि इस्लाम में महिला-पुरुष का पहनावा बिल्कुल सही और आदर-सम्मान का सूचक भी है।

आदित्य के सवालों का आचार्य मोहित पांडेय ने दिया जवाब

1. हर धर्म, मज़हब में देवी-देवताओं को पूजने को अपना-अपना रिवाज़ है। इसमें कोई धर्म छोटा-बड़ा या अच्छा-बुरा नहीं होता है। पूजा-पद्धति पर सवाल विशुद्ध रूप से धार्मिक स्वरूप के आधार पर होता है।
2. ये आस्था से जुड़ा प्रश्न है। हर आस्थावान व्यक्ति अपने धर्म को सबसे पुराना मानता है, धर्म की वर्तमान स्थिति क्या है, ये ज्यादा मायने रखता है।
3. हिंदू धर्म का एक विराट स्वरूप है। नियम उसे मानने वाले पर लागू होते हैं, जो जिस धर्म को मानता है, उसके लिए वह सबसे बड़ा है, साफ-सुथरा है।
4. हिंदू धर्म में शाकाहार को सर्वोपरि माना गया है, लेकिन खानपान धर्म के पहचान का पैमाना नहीं हो सकता है। ये व्यक्ति की निजी आजादी से जुड़ा विषय है।
5. हिंदू धर्म में एक शादी को श्रेष्ठ दर्जा दिया जाता है, लेकिन कोई पाबंदी नहीं है। ये धर्म का विषय हो ही नहीं हो सकता है। ये इंसान की अपनी निजता का प्रश्न है। अल्लाह ने ये कहां कहा है कि जितनी मर्जी शादियां करो?
6. हिंदू धर्म में शव को जलाने के पीछे कई तर्क हैं। सबसे बड़ा तर्क है, मोक्ष की प्राप्ति। इस प्रश्न को ईश्वर और अल्लाह से जोड़ना गलत है, क्योंकि हिंदुओं में कई जातियां ऐसी हैं, जो शवों को जलाने के बजाय दफनाती भी हैं।
7. पहनावा धार्मिक पहचान से ज्यादा व्यक्ति की अपनी स्वतंत्रता का विषय है। इसे धर्म के आधार पर अच्छे-बुरे में बांटना गलत है। अगर ऐसा है, फिर तो मुस्लिम युवा, जींस और टी-शर्ट क्यों पहनते हैं? सबका लिबास धर्म के आधार पर क्यों न हो?
(आचार्य मोहित पांडेय, वेद विद्यालय प्रयागराज में कार्यरत हैं।)

आदित्य साइन लैंग्वेज टीचर से बात करते हुए। वैसे आदित्य की मां ज्योति भी मूक-बधिर स्कूल में टीचर हैं। इसलिए वे अपने बेटे की भाषा को अच्छे से समझती हैं।

मौलानाओं ने वीडियो दिखाकर ब्रेनवॉश किया
ज्योति का कहना है कि मौलानाओं ने मूक बधिर बच्चों को टारगेट कर तरह-तरह के वीडियो दिखाकर ब्रेनवॉश किया है। ज्योति के मुताबिक, मौलानाओं ने इस्लाम से जुड़े कई तरह के वीडियो तैयार किए हैं, जिनमें यही बताया गया है कि इस्लाम सबसे अच्छा धर्म है, जबकि हिंदू और अन्य धर्म के बारे में बुराई की गई है। इन वीडियो को लगातार बच्चों को दिखाया गया है। ज्योति कहती हैं कि हिंदुओं में इस तरह का कोई वीडियो नहीं बनाया जाता है। ऐसे में आदित्य को समझाने में अब काफी दिक्कत हो रही है।

7 साल पहले मुस्लिम टीचर के संपर्क में आया था
ज्योति के मुताबिक 7 साल पहले उनका बेटा चमनगंज इलाके में स्थित हलीम मुस्लिम कॉलेज में सप्ताह में 1 दिन इस्लाम की शिक्षा देने वाले मोहम्मद वासिफ के संपर्क में आया था। मोहम्मद वासिफ ने वीडियो के जरिए उसका ब्रेनवाॅश किया और बाद में अपने गिरोह के हवाले कर दिया।

अदित्य की मां ने अब इस बात का बीड़ा उठाया है कि वह मूक बधिर बच्चों के लिए ऐसे वीडियो बनाएंगी, जिनसे बच्चों को धर्म की सही जानकारी दे सकें। ताकि भविष्य में कोई दूसरा आदित्य अब्दुल न बन सके।

ये था पूरा मामला
आदित्य के घर वाले बताते हैं कि 2015 में आदित्य मूक बधिर विद्यालय में पढ़ाई कर रहा था। तब सभी धर्मों की जानकारी के लिए स्कूल की तरफ से उसे हलीम मुस्लिम कॉलेज में हफ्ते में एक दिन की क्लास लेने के लिए भेजा जाता था। जहां उसकी मुलाकात मोहम्मद वासिफ से हुई। उसके बाद से वह लगातार वासिफ के संपर्क में रहा और 10 मार्च 2021 को चुपचाप घर छोड़कर उनकी टीम का हिस्सा बन गया।

इन 7 सालों में वासिफ और अन्य मौलानाओं ने आदित्य के जेहन में हिंदू धर्म के प्रति नफरत भर दी और इस्लाम को सबसे अच्छा बताया। इस बीच चुपचाप आदित्य का धर्म परिवर्तन कराकर उसे अब्दुल बना दिया गया था। साभार-दैनिक भास्कर

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