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सेक्सटॉर्शन का अड्डा बने चुल्हेड़ा से ग्राउंड रिपोर्ट:राजस्थान के इस गांव में 10 साल पहले कच्चे घर थे, लेकिन अब आलीशन मकान हैं; गांव के लोग अपना नाम तक बताने से बचते हैं

पढ़िए  दैनिक भास्कर की ये खबर…

सेक्सटॉर्शन यानी सोशल मीडिया पर अश्लील कॉल कर किसी व्यक्ति का आपत्तिजनक हालात में वीडियो बना लेना और फिर उसे ब्लैकमेल कर पैसे वसूलना। लॉकडाउन के दौरान इस तरह के मामले पांच गुना यानी 500% तक बढ़ गए हैं। दैनिक भास्कर ने इसकी तह तक जाने की कोशिश की।

सेक्शटॉर्शन का यह धंधा राजस्थान के भरतपुर के मेवात इलाके से चलाया जाता है और देश के बड़े हिस्से के लोगों को ब्लैकमेलिंग का शिकार बनाया जाता है। भरतपुर के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ‘हर महीने यहां दूसरे राज्यों की पुलिस के मदद मांगने के 40-50 केस आते हैं जो सेक्सटॉर्शन से संबंधित होते हैं। कुल मामलों का यह सिर्फ 10% होते हैं क्योंकि ज्यादातर लोग बदनामी के डर से केस ही नहीं दर्ज कराते हैं।’

सेक्सटॉर्शन के नेटवर्क की पड़ताल के लिए दैनिक भास्कर की रिपोर्टर दिल्ली से 240 किमी दूर भरतपुर के खोह थाने में पहुंची। मेवात इलाके के इस थाना क्षेत्र के ज्यादातर गांव सेक्सटॉर्शन और ऑनलाइन फ्रॉड जैसे धंधे में लिप्त हैं। थाने से मिली जानकारी के आधार पर हम एक गांव पहुंचते हैं, जिसका नाम है- चुल्हेड़ा।

गोवर्धन रेंज के नीचे पहाड़ों की तलहटी में बसे चुल्हेड़ा गांव तक पहुंचने का रास्ता बेहद ऊबड़-खाबड़, पथरीला और कीचड़ से भरा है। सेक्स चैट और वीडियो बनाकर लोगों को ब्लैकमेल करने को लेकर चर्चित इस गांव के हालात के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे, लेकिन पहले गांव से जुड़ी दो बातें जो यहां के सामाजिक-आर्थिक हालात को बताती हैं-

पहली बात: चुल्हेड़ा शिक्षा के लिहाज से बेहद पिछड़ा हुआ है। 1200 लोगों की आबादी वाले इस गांव के सिर्फ तीन युवक सरकारी नौकरी में हैं। एक सेना में, दूसरा पुलिस में और तीसरा टीचर है। ज्यादातर लोग ड्राइवर हैं या फिर पत्थर तोड़ने का काम करते हैं।

दूसरी बात: दस एक साल पहले तक इस गांव के ज्यादातर घर कच्चे थे और रहन-सहन औसत से भी नीचे था, लेकिन पिछले पांच साल में गांव का नक्शा बदलना शुरू हुआ और तेजी से पक्के मकान और गाड़ियों की संख्या बढ़ गई।

यह बदलाव एकाएक कैसे आया? इसके लिए पैसा कहां से आ रहा है? गांव के आसपास रोजगार या पैसे कमाने के बहुत मौके पैदा हुए हों, ऐसा भी नहीं है? ऐसे ही सवालों का जवाब जानने के लिए हमने मोटरसाइकिल पर जा रहे एक शख्स से बात करने की कोशिश की, लेकिन इसके जवाब में उसने हमें सावधान करते हुए कहा कि ‘आप यहां तक तो आ गई हैं, लेकिन यहां से आगे जाना आपके लिए ठीक नहीं है। वापस लौट जाइए।’ ये गांव के स्कूल के प्रिंसिपल थे, जिन्होंने बहुत आग्रह करने पर भी न अपना नाम बताया और न ही इससे ज्यादा बात की।

भरतपुर के चुल्हेड़ा गांव में सेक्सटॉर्शन के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन गांव के लोग इस बारे में ज्यादा बात करने पर कतराते हैं। अधिकतर लोग कहते हैं कि गांव को बदनाम किया जा रहा है, लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि यहां के कुछ लोग इस धंधे में लिप्त हैं।

गाड़ी से उतरकर हम आगे बढ़ते हैं। हमें बाजरे के कुछ खेत और बारिश का इंतजार करती वीरान जमीन और सूखे पहाड़ दिखते हैं। कुछ दूर चलने पर बकरियां चराकर लौट रहा एक लड़का हमें दिखता है। मैं पूछती हूं कि ‘क्या इस गांव से कुछ लोगों को ब्लैकमेलिंग और ठगी के लिए पकड़ा गया है?’ इस पर दूसरी तरफ से मुस्कराता हुआ जवाब आता है कि ‘आप गांव जा रहे हैं, आपको खुद ही पता चल जाएगा।’

चुल्हेड़ा गांव में ज्यादातर आबादी मेवाती लोगों की है, जो अपने आप को मेव मुसलमान बताते हैं। दूर से देखने पर ये किसी सामान्य गांव सा लगता है। दूर तक फैले खेत और धूल में खेलते बच्चे। कहीं से भी ये एहसास नहीं होता कि आप ऐसे गांव में हैं जहां से देशभर में लोगों के साथ ऑनलाइन स्कैम किए जा रहे हों, लेकिन जैसे-जैसे आप गांव के भीतर जाते हैं, नए बने मकान और घरों के बाहर खड़ी गाड़ियां आपको चौंका देती हैं। ।

मैं सबसे पहले गांव के बाहर के घरों के पास रुकी। लोगों से सेक्सटॉर्शन और फ्रॉड के धंधे से गांव का नाम जुड़ने को लेकर बात करने की कोशिश की। बिना नाम बताए एक बुजुर्ग कहते हैं कि ‘पहले जो लोग घर पर छप्पर तक नहीं डाल पाते थे, दो वक्त की रोटी मुश्किल थी, वे अब कोल्ड ड्रिंक से कुल्ला कर रहे हैं और घरों में संगमरमर ठुकवा रहे हैं। किसी सही तरीके से एकाएक तो इतना पैसा आ नहीं सकता।’

पीतल की ईंट को सोने की बताकर ठगी के लिए चर्चित रहा है इलाका

गांव में लोगों के आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का धंधा कब से शुरू हुआ? इस पर एक बुजुर्ग बताते हैं कि ‘राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मेवात इलाके के गांवों में ठगी पहले भी होती रही है। पहले लोग पीतल की ईंट को सोना बताकर बेच देते थे। उन्हें टटलूबाज कहा जाता था। इसके बाद जब इंटरनेट और कैशलेस लेनदेन आया तो पहले ऑनलाइन ठगी शुरू हुई और अब ये सेक्सटॉर्शन जैसे क्राइम तक पहुंच गई है।’

कुछ और आगे बढ़ने पर दीवारों पर ‘इरफान समाजसेवी’ के इश्तेहार लगे हैं। इरफान कहते हैं कि ‘आपको किसी दूसरे मुद्दे पर बात करनी है तो कीजिए, इस बारे में मैं नहीं बोल पाऊंगा, आप मेरी मजबूरी समझिए। सभी को इसी गांव में रहना है।’ इरफान की बात सही साबित होती है। हमारी गाड़ी जैसे ही गांव के एक चौराहे पर पहुंची, लोग शक भरी निगाहों से देखने लगे। एक बुजुर्ग हम से ही सवाल पूछते हैं कि ‘इस गांव में क्यों चक्कर काट रहे हो, क्या मामला है?’ उनके चेहरे पर डर और उत्सुकता दोनों थीं।’

गांव के लोगों के ऑनलाइन ठगी में शामिल होने के सवाल पर वो कहते हैं कि ‘सब पुलिस का फैलाया झूठ है। बेवजह लोगों को पकड़ ले जाते हैं।’ वहीं, एक परचून की दुकान पर बैठे लोग इसका उल्टा बताते हैं। पता चलता है कि चार लड़के कल ही जमानत पर छूटे हैं] लेकिन उन बुजुर्ग के नजदीक आते ही सब खामोश हो जाते हैं।

बीते पांच सालों में भरतपुर के मेवात के चुल्हेड़ा गांव में तेजी से पैसा आया है। कभी कच्चे घरों वाले इस गांव में तेजी से पक्के मकान बने हैं और चौपहिया गाड़ियां भी आई हैं, लेकिन लोग घरों की फोटो नहीं खींचने देते हैं।

इन बुजुर्ग का नाम जानने के लिए काफी खोजबीन करनी पड़ती है। फिर कोई दबी आवाज में बताता है कि इनका नाम ममरेज है। इनका भी नया मकान बन रहा है। दूसरे राज्य की पुलिस इनके दो बेटों को पकड़कर ले गई थी। कुछ दिन पहले ही वे दोनों जमानत पर बाहर आए हैं।

थोड़ी दूरी पर हमें अजीम मिलते हैं जो अपने दो भाइयों के साथ पत्थर तोड़ने जा रहे थे। पूरा दिन मेहनत करके वो बमुश्किल तीन-चार सौ रुपए कमा पाते हैं। अजीम कहते हैं कि ‘मेरी उम्र के बहुत से लड़कों ने साल-डेढ़ साल के भीतर ही मोटा पैसा कमाया है। आप समझ लीजिए।’ गांव के आखिर में पहुंचने पर हमें कुछ औरतें मिलती हैं। बात करने पर ज्यादातर कहती हैं कि ‘यहां ठगी का कोई काम नहीं होता है, बस लोगों को बदनाम किया जा रहा है।’ तभी, इन्हीं में से एक औरत बोल पड़ती है कि ‘अगर ठगी नहीं हो रही है तो फिर ये बड़े-बड़े घर कैसे बन रहे हैं?’

कैसे काम करता है नेटवर्क और भरतपुर का मेवात क्यों सेंटर बन गया?

करीब 40 साल उम्र के एक शख्स ने बताया, ‘पहले गांव के कुछ लोग ऑनलाइन ठगी का काम करते थे। जैसे ऑनलाइन किसी चीज का विज्ञापन देकर उसे बहुत सस्ते में देने का झांसा दिया जाता था और कुछ पैसे एडवांस लेकर ठगा जाता था, लेकिन सेक्स वीडियो बनाकर लोगों को ठगने का काम एकाध साल में ज्यादा बढ़ा है।’

सेक्सटॉर्शन का धंधा चुल्हेड़ा जैसे गांवों में कैसे फैला, इसे सिलसिलेवार तरीके से कुछ यूं समझा जा सकता है-

पहला: मेवात इलाके के चुल्हेड़ा जैसे गांव ठगी के लिए पहले से चर्चित थे। इस वजह से बाहर के कुछ गिरोह ने गांव के बेरोजगार लड़कों को अपने नेटवर्क से ज्यादा पैसों का लालच देकर जोड़ लिया।

दूसरा: इन लड़कों को एक मोबाइल और सिम दिया जाता है। इनका काम होता है कि किसी महिला का प्रोफाइल बनाकर सोशल मीडिया पर लोगों से सेक्स चैट करना और उन्हें वीडियो कॉल के लिए उकसाना। अगर कोई झांसे में आ जाता है तो स्क्रीन रिकॉर्डर से वीडियो रिकॉर्ड कर लिया जाता है।

तीसरा: इसके बाद दूसरे लोगों का काम शुरू होता है और वे संबंधित आदमी को अलग-अलग जगहों और नंबरों से फोन कर धमकाते हैं कि उनका न्यूड वीडियो रिकॉर्ड हो गया है और अगर उन्होंने पैसे नहीं दिए तो उनका वीडियो वायरल कर दिया जाएगा।

चौथा: इस धंधे की एक और कड़ी होती है जो पैसे मंगवाने के लिए बैंकों में फर्जी तरीके से खाते खुलवाती है।

भरतपुर के मेवात इलाके में रोजगार के भी ज्यादा साधन नहीं है। गुजर-बसर का तरीका या तो खेती है या पत्थर तोड़ने का काम। पुलिस का कहना है कि ऐसे में ईजी मनी के लिए कई बेरोजगार सेक्सटॉर्शन जैसे काम करने वाले गिरोहों का हिस्सा बन जाते हैं।

चुल्हेड़ा और आसपास के गांव के जो लड़के इस धंधे में लिप्त हैं, वे इस धंधे की शुरुआती कड़ी होते हैं। उनका काम होता है लोगों को वीडियो कॉल कर फंसाना। इसके बाद वसूली होने पर उन्हें उसका 10 से 15% पैसा मिल जाता है। कई बार उन्हें यह तक पता नहीं होता है कि पैसे कितने वसूले गए हैं।

खोह थाने के अधिकारी बताते हैं कि ‘भरतपुर का मेवात इलाका और चुल्हेड़ा जैसे गांव सेक्सटॉर्शन के केंद्र के तौर पर इसलिए चर्चित हो गए, क्योंकि पहली वीडियो कॉल ज्यादातर इन्हीं इलाकों से की जाती है। इसलिए पुलिस की खोजबीन में सबसे पहले इन्हीं नंबरों को तलाशा जाता है। यही लोग सबसे पहले पुलिस की गिरफ्त में आते हैं। बाकी लोगों के बारे में सबूत जुटा पाना या उन्हें पकड़ना बहुत मुश्किल होता है।’

अब शाम हो रही है। हम गांव से निकलने की सोचते हैं। खेतों की हरियाली पर शाम के धुंधलके का असर दिख रहा है। हमारी गाड़ी चल पड़ती है। रास्ते में हमें सिर पर टोपी लगाए छोटे-छोटे बच्चे मिलते हैं। हाथों में धार्मिक किताब लिए मस्जिद की ओर जा रहे ये बच्चे हमें दूर तक दिखते रहते हैं।

(इस पड़ताल का दूसरा हिस्सा कल पढ़िए। जिसमें हम बताएंगे उन लोगों की कहानी जो पहले सेक्सटॉर्शन के धंधे में शामिल थे, लेकिन अब छोड़ चुके हैं।) साभार-दैनिक भास्कर

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