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‘हमने मोदी को जिताया की रट लगाते हो, खुद 2 बार लड़े तो क्यों नहीं जीत गए?’ महिला पत्रकार ने उतार दी राकेश टिकैत की ‘बक्कल’

पढ़िये ऑपइंडिया की ये खास खबर….

दिल्ली की सीमाओं पर कई महीने से चल रहे ‘किसान आंदोलन’ से यौन शोषण से लेकर मारपीट तक की कई खबरें आई हैं। आंदोलन के शीर्ष नेताओं में से एक राकेश टिकैत अक्सर मीडिया में आकर बयानबाजी करते रहते हैं और ‘बक्कल उतारने’ की बातें करते हैं। लेकिन, ‘इंडिया 1 न्यूज़’ पर कुछ ऐसा हुआ कि लोग कहने लगे कि महिला पत्रकार ने ही भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता राकेश टिकैत की ‘बक्कल’ उतार दी।

हुआ कुछ यूँ कि पत्रकार गरिमा सिंह ने कहा कि राकेश टिकैत बार-बार कह रहे हैं कि मेल-मुलाकात से चीजें ठीक हो जाएँगी, फिर इतना कड़ा होने की ज़रूरत क्या है? इस पर राकेश टिकैत ने जवाब दिया कि दिमाग की बुखार कड़वी दवाई से ही ठीक होती है। साथ ही गरिमा सिंह ने राकेश टिकैत के इस बयान को लेकर भी सवाल पूछा जिसमें वो बार-बार कहते हैं कि इस सरकार को ‘हमने जिताया’।

गरिमा सिंह ने पूछा कि अगर भाजपा और नरेंद्र मोदी को आपने जिताया तो फिर खुद दो-दो बार चुनाव लड़ने के बावजूद क्यों नहीं जीत गए? इस पर राकेश टिकैत ने कहा कि उन्हें जनता ने वोट नहीं दिया और वो हार गए। फिर पत्रकार से ही उलटा सवाल पूछने लगे कि उन्होंने किसे वोट दिया है। गरिमा सिंह ने कहा कि वो यहाँ बताने के लिए नहीं, पूछने के लिए बैठी हैं। इस पर राकेश टिकैत पूछने लगे कि क्या आप भाजपा से डरते हो?

पत्रकार ने कहा कि भाजपा के लोग आते हैं तो वो भाजपा से भी सवाल पूछती हैं। राकेश टिकैत ने कहा कि हम किसे वोट देंगे, ये हम तय करेंगे और इसे हमें गोपनीय रखने का अधिकार है। राकेश टिकैत बार-बार ये कहते रहे कि उन्हें जनता ने वोट नहीं दिया और वो हार गए। फिर कहने लगे कि आंदोलन में उनकी ‘जीत’ हुई है। उन्होंने दावा कर दिया कि दिल्ली के चारों तरफ बैठ कर उन्होंने ‘गोरा-लाठी’ की है और तब तक दिल्ली में बैठे रहेंगे जब तक सरकार बात नहीं मान लेगी।

बता दें कि हाल ही में राकेश टिकैत ने अब समानांतर संसद चलाने की धमकी दी है। टिकैत ने यह धमकी आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा ‘किसानों’ को केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने के बाद दी थी। टिकैत ने कहा था, “किसान अपनी संसद चलाएँगे। सदन में किसानों के लिए आवाज नहीं उठाने पर संसद सदस्यों (सांसदों) की उनके निर्वाचन क्षेत्रों में आलोचना की जाएगी।”

साभार-ऑपइंडिया

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