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भारत बना 15 सदस्‍य वाली संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का अध्‍यक्ष तो पाकिस्‍तान को लगी मिर्ची, जानें- क्‍या कहा

पढ़िये दैनिक जागरण की ये खास खबर….

देश के 75वें स्‍वतंत्रता दिवस से पहले ही भारत को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के अध्‍यक्ष बनने का गौरव हासिल हुआ है। भारत ने इस मौके पर अपना एजेंडा भी दुनिया के सामने साफ कर दिया है। इसका समर्थन अन्‍य देशों ने भी किया है।

नई दिल्‍ली (रायटर/एएनआई)। भारत आज दुनिया की सबसे ताकतवर माने जाने वाली 15 सदस्‍यों वाली संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की अध्‍यक्षता प्राप्‍त कर ली है। भारत ने फ्रांस से इस दायित्‍व को हासिल किया है। इस मौके पर भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनैन ने कहा कि उनका देश भारत के साथ रणनीतिक मुद्दों पर जैसे समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ युद्ध और शांति सेना समेत अन्‍य मुद्दों पर साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्‍होंने ये भी कहा कि फ्रांस भारत के साथ नियम आधारित बहुपक्षीय प्रणाली को कायम रखने के लिए भी पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। इस मौके पर भारत में मौजूद रूस के राजदूत ने भी इस पर अपनी सहमति जताई है। रूसी राजदूत निकोले कुदाशेव ने कहा कि फ्रांस की तरफ से जो मुद्दे बताए गए हैं उनसे रूस भी पूरी तरह से सहमत है। उनका देश भी इन मुद्दों पर कारगर रूप से काम करने का इच्‍छुक है।

इस पर पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रालय ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता जाहिद हाफिज चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान उम्‍मीद करता है कि भारत अपनी अध्‍यक्षता में निष्‍पक्ष रूप से काम करेगा। चौधरी ने ये भी कहा कि भारत सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता के संचालन को नियंत्रित करने वाले प्रासंगिक नियमों और मानदंडों का पालन करेगा। इस मौके पर पाकिस्‍तान ने एक बार फिर से जम्‍मू कश्‍मीर का भी जिक्र छेड़ा। प्रवक्‍ता ने ये भी कहा कि भारत का अध्‍यक्ष बनने का अर्थ ये भी है कि पाकिस्‍तान जम्‍मू कश्‍मीर के मुद्दे को इस मंच पर नहीं उठा सकेगा।

आपको बता दें कि 15 सदस्यीय वाली सुरक्षा परिषद में कुछ-कुछ समय के बाद इसके अस्‍थाई और स्‍थायी सदस्‍यों को इसकी अध्‍यक्षता करने का मौका मिलता है। ये मौका एल्‍फाबेट के आधार पर दिया जाता है। इस अवसर पर यूएन में भारत के राजदूत टीएस त्रिपूर्ति ने कहा कि देश के 75वें स्‍वतंत्रता दिवस से पहले इस अवसर का मिलना वास्‍तव में बेहद खास अनुभव है। उन्‍होंने ये बात एक यूएनएससी में वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान कही एक दिन पहले कही।

भारत ने अध्‍यक्ष पद का कार्यभार मिलने के साथ ही अपना काम शुरू कर दिया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर भारत का काम सोमवार 2 अगस्‍त से शुरू होगा। इस पद पर भारत के आसीन होने के बाद त्रिमूर्ति एक प्रेस कांफ्रेंस भी करेंगे जिसमें इस माह होने वाले काम का ब्‍यौरा प्रस्‍तुत किया जाएगा। इसके अलावा वो सुरक्षा परिषद के अस्‍थाई सदस्‍यों को भी यूएन के शड्यूल के तहत होने वाले सभी कार्यों का ब्‍यौरा प्रस्‍तुत करेंगे।

आपको बता दें कि भारत 1 जनवरी 2021 को संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का अस्‍थायी सदस्‍य नियुक्‍त किया गया था। भारत को दो वर्षों के लिए इसका अस्‍थायी सदस्‍य बनाया गया है। भारत दिसंबर 2022 में एक बार फिर से इस पद पर आसीन होगा। त्रिमूर्ति का कहना है कि समुद्री सुरक्षा भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता में शामिल है। उन्‍होंने ये भी कहा कि भारत चाहता है कि सुरक्षा परिषद इस मुद्दे गंभीरता दिखाएगी। वहीं शांति सेना के मुद्दे पर बात करते हुए उन्‍होंने कहा कि ये भारत के दिल को हमेशा से ही छूता रहा है।

भारत लंबे समय से संयुक्‍त राष्‍ट्र की शांति सेना का सदस्‍य रहा है। इसलिए भारत की चिंता शांतिरक्षकों की सुरक्षा हिफाजत भी है। भारत चाहता है कि उनकी हिफाजत को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके लिए उन्‍हें उत्‍तम तकनीक हासिल होनी चाहिए और शांतिरक्षकों के साथ होने वाले अपराधों पर न्‍याय मिलना चाहिए। त्रिमूर्ति ने कहा कि एक देश के तौर भारत लंबे समय से आतंकवाद को झेलता रहा है। साभार-दैनिक जागरण

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