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बिल्डर बाबा समेत 32 के खिलाफ वारंट जारी:गाजियाबाद में फर्जी डॉक्यूमेंट्स पर बैंकों से लिया था करोड़ों का लोन, अब CBI कोर्ट ने जारी किए NBW

पढ़िये दैनिक भास्कर की ये खास खबर….

गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने सचिन दत्ता उर्फ बिल्डर बाबा समेत 32 लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। उन्हें 11 अगस्त तक कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। बिल्डर बाबा पर फ्लैट खरीदने के लिए फर्जी डॉक्यूमेंट्स पर कई करोड़ रुपए का बैंक लोन लेने का आरोप है, जबकि जांच में मौके पर कोई फ्लैट ही नहीं पाए गए थे। सचिन दत्ता समेत तीन आरोपी जेल में बंद हैं, बाकी आरोपी फरार चल रहे हैं। इसमें कुछ बैंक अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं।

बिल्डर बाबा पर हैं 20 से ज्यादा मुकदमे

एडवोकेट जयइंद्र शर्मा के अनुसार, क्रॉसिंग रिपब्लिक की एक सोसाइटी में 80 फ्लैट तैयार करके उन पर फर्जी दस्तावेजों से 40 करोड़ रुपए का लोन कई बैंकों से साल 2017-2018 में लिया गया। इस मामले में बिल्डर बाबा के खिलाफ जून-2020 में कुल 19 मुकदमे विभिन्न थानों में दर्ज हुए। आनंद विहार निवासी नरेंद्र बरमेचा से ही बिजनेस पार्टनर बनाने के नाम पर 11.30 करोड़ रुपये ठगे गए थे। बाबा पर गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली में 20 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। सभी की जांच सीबीआई ने की और एक हफ्ते पहले ही 32 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट स्पेशल कोर्ट में पेश की है।

सीबीआई ने बैंक लोन घोटाले में आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किए हैं।

सीबीआई ने एक हफ्ते पहले पूरी की जांच
सीबीआई ने 8 जनवरी 2020 को कथित महामंडलेश्वर सच्चिदानंद गिरि महाराज उर्फ बिल्डर बाबा उर्फ सचिन दत्ता के खिलाफ छह मुकदमों में पहली बार चार्जशीट लगाई थी। इसके बाद एक के बाद एक 32 मुकदमों में चार्जशीट लगी। सीबीआई की जांच एक हफ्ते पहले ही पूरी हुई है। सीबीआई ने इसमें सचिन दत्ता की कंपनी बालाजी हाईटेक कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के अलावा अनिल जैन, विनोद पांडेय और देवेंद्र सिंह को भी आरोपी बनाया। आरोप है कि इन लोगों ने गाजियाबाद के कई इलाकों में बनाए गए फ्लैट को दो से तीन बार बेचकर उन पर अलग-अलग बार लोन पास कराया। इसमें कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई जा रही है।

नाइट क्लब चलाने में महामंडलेश्वर पद से हटा था सचिन दत्ता
बिल्डर बाबा का असली नाम सचिन दत्ता है। सचिन को महज छह दिन के लिए साल-2015 में निरंजनी अखाड़े का महामंडलेश्वर बना दिया गया था। इसके बाद उनका नया नाम सच्चिदानंद गिरि हो गया। पता चला कि बाबा नोएडा सेक्टर-18 में एक नाइट क्लब ‘क्वांटम द लीप’ नाम से चलवा रहे हैं। इसलिए छह दिन बाद ही उन्हें महामंडलेश्वर पद से हटा दिया गया था।

बाबा के कारनामे

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