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नमन कीजिए भारत के वीरपुत्र सेवा सिंह जी को, जिन्होंने पाकिस्तान द्वारा भारत पर गिराए गए 1000 बमों को अकेले किया था डिफ्यूज

पढ़िये सुदर्शन न्यूज की ये खास खबर….

भारत की सीमा पर हमारी सुरक्षा का लिए खड़े जवानाें की हम जितनी भी तारीफ़ करे उतना ही कम है. सीमा पर दुश्मनाें के खिलाफ़ शाैर्य दिखाना भला आसान थाेड़ी है. उसके लिए दिल में अपने देश के लिए वाे जज़्बा हाेना चाहिए जाे सीमा पर खड़े जवानाें में हाेता है. वाे कहते है ना कि माैत से लड़ने के लिए माैत का डर खत्म करना पड़ता है, कि अगर दुश्मन सामने हाे ताे बिना किसी डर के उसका सामना कराें। इसी जज़्बे काे लेकर हमारे जवान रात दिन सीमा पर खड़े रहते हैं.

आज हम ऐसे ही एक भारतपुत्र की जांबाज़ी कहानी बताने जा रहे हैं जिसने अकेले ही पाकिस्तान के नापाक मंसूबे काे नाकाम कर दिया। उस वीरपुत्र का नाम है सेवा सिंह। जीरा गांव में सेवा सिंह ने अपना शाैर्य दिखाते हुए पाकिस्तान द्वारा भारत पर गिराए 1000 बमाें काे नंगे हाथों डिफ्यूज किए थे. उनकी बहादुरी के लिए उन्हे ‘शौर्य चक्र’ भी मिला था. ये उस समय की बात है जब भारत-पाकिस्तान के बीच दिसंबर 1971 में 14 दिनों तक युद्ध चला था.

एयरड्रॉप किए गए पाकिस्तानी बमों को नंगे हाथों से डिफ्यूज करना जानलेवा हो सकता था लेकिन देश के लिए सेवा सिंह को यह भी मंजूर था। 92 साल के सेवानिवृत्त सूबेदार सेवा सिंह को यह घटना आज भी याद है कि पुणे के किरकी में सेना के बॉम्बे इंजिनियर ग्रुप के बम निरोधक प्लाटून का हिस्सा होने दौरान उन्होंने इस ऑपरेशन को सफल किया। उनकी इस बहादुरी के लिए ‘शौर्य चक्र’ भी मिला था.

वह आज चलने में असमर्थन हैं, उन्हें ठीक से सुनाई नहीं देता ठीक से बोल नहीं सकते, लेकिन यह घटना उनकी याद में आज भी ताजा है। दिसंबर 1971 में भारत-पाकिस्तान का 14 दिनों तक युद्ध चला। 3 से 17 दिसंबर के बीच, पाकिस्तानियों ने पंजाब और जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में नागरिक और सैन्य ठिकानों पर लगभग 1,000 बम गिराए थे।

तब पाकिस्तान ने पंजाब के जीरा गांव (अब का फिरोजपुर) पर कई बम गिराए, जिनमें से छह में विस्फोट नहीं हुआ और उनमें से एक भारतीय खाद्य निगम के गोदाम में अनाज की बोरियों के ढेर पर गिरा। उन्हे जीरा बमों को निष्क्रिय करने और फिरोजपुर के पास एफसीआई गोदाम को बचाने का काम सौंपा गया था। तब उन्हाेंने अपनी जान की परवाह न करते हुए देश के लाेगाें की चिंता की. और बिना किसी भय के अकेले ही फिरोजपुर के उन पांच बमाें काे नंगे हाथाें ही डिफ्यूज किया। बता दें कि बिना किसी सुरक्षासूट के निष्क्रिय कर दिया।

बता दें कि सेवा सिंह की इस वीरता के लिए उन्हे 24 दिसंबर 1971 को तत्कालीन भारतीय राष्ट्रपति वराहगिरी वेंकट (वीवी) गिरि ने ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया और सैनिक को अपने परिवार के साथ राष्ट्रपति के आवास पर रहने का भी मौका मिला। 7 अगस्त, 1974 को उन्हें रक्षा मंत्रालय में तत्कालीन सचिव गोविंद नारायण की ओर से लिखा गया प्रशस्ति पत्र भी मिला।

साभार-सुदर्शन न्यूज

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