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राम मंदिर के पुरोधा अशोक सिंहल के नाम से जानी जाएगी ‘घटिया आजम खां’ सड़क

आगरा। घटिया आजम खां मार्ग का नाम बदलकर रामजन्म भूमि आंदोलन की अगुवाई करने वाले विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल के नाम पर किया गया है। यह फैसला आगरा नगर निगम की कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। इसके अलावा कार्यकारिणी के सदस्यों के प्रस्तावों पर और भी कई सड़कों का नामकरण किया गया है।

सोमवार को स्मार्ट सिटी कक्ष में नगर निगम कार्यकारिणी के 16वें अधिवेशन की बैठक मेयर नवीन जैन की अध्यक्षता में हुई। उपसभापति पार्षद जगदीश पचौरी ने सिटी स्टेशन रोड पर 27 सितंबर को जन्मे अशोक सिंघल के नाम पर घटिया आजम खां रोड का नाम रखने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि सिटी स्टेशन रोड आगरा पर जन्मे अशोक सिंघल ने किशोरावस्था में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के साथ-साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी। 1950 में बीएचयू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज के लिए समर्पित कर दिया। 1981 में वह विश्व हिंदू परिषद में भी शामिल हुए।

उन्होंने कहा कि 1984 में धर्म संसद के आयोजन में अशोक सिंघल ने मुख्य भूमिका निभाई थी और इसी धर्म संसद में साधु संतों की बैठक के बाद श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन की नींव पड़ी थी। त्याग एवं बलिदान के प्रणेता रहे अशोक सिंघल की याद में उनके जन्म स्थान के पास घटिया आजम खां मार्ग के नाम को बदलकर अशोक सिंघल मार्ग रखा जाए। इस प्रस्ताव पर सभी लोगों ने सहमति जताई और प्रस्ताव को पास कर दिया।

नगर निगम कार्यकारिणी ने शहर में आठ प्रमुख सड़कों, चौराहों के नाम बदल दिए। घटिया आजम खां रोड के अलावा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तात्या टोपे के नाम पर किदवई पार्क रोड, पुलवामा शहीद कौशल कुमार रावत के नाम पर कहरई मोड़ चौराहा, शास्त्रीपुरम चौराहा भगवान चित्रगुप्त चौराहा के नाम से जाना जाएगा। महाराजा सूरजमल, पूर्व मंत्री स्व. सत्यप्रकाश विकल, समाजसेवी देवी प्रसाद आजाद के नाम पर भी सड़कें और चौराहों के नाम रखे गए हैं।

धर्म संसद में निभाई थी मुख्य भूमिका
अशोक सिंघल वर्ष 1981 में विश्व हिंदू परिषद में शामिल हुए। देश में हिंदुत्व की भावना को मजबूत बनाने के लिए 1984 में धर्म संसद के आयोजन में अशोक सिंघल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इसी धर्म संसद में साधु संतों की बैठक के बाद श्री राम जन्मभूमि आंदोलन की नींव पड़ी थी। इन्हीं के प्रयास के चलते ही राम मंदिर आंदोलन का विस्तार पूरे देश में हुआ था। उन्होंने कहा था ‘यह मात्र एक मंदिर का नहीं हिंदू राष्ट्र का शिलान्यास है।’

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