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घोटाला करने के जुर्म में पति-पत्नी को मिली जेल

गाज़ियाबाद। सीबीआइ की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना सिंह की अदालत ने शुक्रवार को घोटाले में पति-पत्नी को सजा सुनाई। पति को एक साल और पत्नी को आठ माह कारावास की अधिकतम सजा सुनाई गई है।

मामला वर्ष 2002-03 का है। महिला प्रधान क्षेत्रीय बचत योजना के तहत अर्चना गर्ग मुजफ्फरनगर प्रधान डाकघर की एजेंट थी। उसका क्लाइंट बनाने और उनके पैसे लेकर डाकघर में जमा कराने का था। इसके एवज में उसे कमीशन मिलता था। सीबीआइ के लोक अभियोजक के मुताबिक अर्चना गर्ग एजेंट जरूर थी लेकिन पूरा कामकाज उसका पति मुकेश गर्ग करता था। आरोप है कि अर्चना और मुकेश गर्ग ने साजिश के तहत 23 क्लाइंट से करीब 70 हजार रुपये डाकघर में जमा करने को लिए, लेकिन जमा नहीं किए।

जांच के दौरान सीबीआइ ने पाया कि अर्चना का पति मुकेश उसके स्थान पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कर देता था। सुनवाई के दौरान सीबीआइ के अभियोजन अधिकारी रिपु दमन सिंह तंवर ने घपले के आरोपी पति-पति को अधिकतम सजा दिए जाने की बात कही। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सीबीआइ की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना सिंह की अदालत ने पति-पत्नी को प्रत्येक धारा में अलग-अलग सजा सुनाई। मुकेश गर्ग को एक साल और अर्चना को आठ माह के अधिकतम कारावास की सजा सुनाई गई है।

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