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जीडीए एलिवेटेड रोड के लिए नये सिरे से देगा प्रजेंटेशन

गाज़ियाबाद। जीडीए एलिवेटेड रोड की एनवायरमेंटल क्लीयरेंस के लिए प्रजेंटेशन तैयार करा रहा है। कंसल्टेंट एजेंसी के सहयोग से इस प्रजेंटेशन को नये सिरे से बनाया जा रहा है। जिसे 17 फरवरी को स्टेट एनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (एसईआइएए) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। प्रजेंटेशन में जीडीए बताने का प्रयास करेगा कि इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। फरवरी अंत तक इस रोड को खोलने का लक्ष्य रखा गया है।

कड़कड़ मॉडल गांव निवासी सुशील राघव ने जुलाई 2016 में एनजीटी में याचिका दायर की थी। इसमें बर्ड सेंचरी और झील के खसरों पर एलिवेटेड रोड का निर्माण होने की बात कही गई थी। यह भी कहा था कि परियोजना विनियमन 2006 की अनुसूची 8 (बी) के अंतर्गत आती है। जीडीए और राज्य सरकार के लिए एसजीआइए, एमओईएफ और सीसी (एसआइसी) से मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य है। इस पर एनजीटी ने प्राधिकरण को छह महीने के अंदर एनवायरमेंटल क्लीयरेंस लेने के आदेश दिए थे।

एनजीटी के आदेश के बाद जीडीए ने 26 दिसंबर 2016 को स्टेट एनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (एसईआइएए) में पर्यावरण स्वीकृति के लिए आवेदन किया था । इस अर्जी को उन्होंने स्टेट एक्सपर्ट एप्रेजल कमेटी (एसईएसी) को भेज दिया था। बाद में पर्यावरण मंत्रालय की तरफ इसकी फाइल भेज दी गई। पर्यावरण मंत्रालय में इंफ्रा कमेटी ने पुल का निर्माण शुरू होने के बाद अर्जी आने पर उल्लंघन समिति के पास फाइल को भेज दिया। इस समिति ने फिर से एनवायरमेंटल क्लीयरेंस के लिए फाइल एसआइएए को भेज दी। अब यह बताएगी कि एलिवेटेड रोड को बनने से पर्यावरण को नुकसान हुआ।

जीडीए ने यूपी गेट से राजनगर एक्सटेंशन तक एलिवेटेड रोड बनाने का काम नवंबर 2014 से काम शुरू किया था। 10.30 किलोमीटर लंबी रोड छह लेन की बनी है। इसे बनाने में 1147.60 करोड़ की लागत आई है। यह प्रोजेक्ट काफी देरी से चल रहा है। जीडीए ने शुरुआत में 29 अप्रैल 2017 इसका निर्माण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन तय समय पर काम पूरा नहीं हो सका। फिर सितंबर डेडलाइन तय हुई। तब भी निर्माण पूरा नहीं हो सकता तो नवंबर तक डेडलाइन खिसका दी गई। फिर भी निर्माण पूरा नहीं हुआ तो 31 दिसंबर तक इसे बनाकर चालू करने का लक्ष्य रखा गया। फिर जनवरी 2018 तय हुआ और अब फरवरी अंत नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 

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