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दिव्यांग बेटे को आईएएस बनाने के लिए अपने कंधे पर बिठाकर कॉलेज ले जाता है पिता

मध्यप्रदेश। कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो इंसान गरीब हो या अमीर, उसके आगे मुश्किलें कुछ भी नहीं है। मध्य प्रदेश के राजगढ़ इलाके में दौलतपुरा के रहने वाले कालूसिंह सोंधिया का इकलौता बेटा जगदीश शारीरिक रूप से दिव्यांग है। कालू सिंह तो अनपढ़ हैं, लेकिन अपने बेटे को पढ़ाने के लिए वे उसे अपनी गोद में लेकर कई किलोमीटर तक पैदल चलते हैं। कुदरत ने भी जगदीश का शरीर ऐसा बनाया कि वह ट्राइसाइकिल भी नहीं चला सकता। कालू सिंह चाहते हैं कि उनका बेटा पढ़ लिखकर बहुत बड़ा अफसर बने लेकिन आर्थिक स्थिति मजबूत न होने की वजह से उन्हें यह कष्ट उठाना पड़ता है।

जगदीश का कद सिर्फ 3 फीट ही है। उसके हाथ पैर भी सही तरीके से काम नहीं करते हैं। इसलिए कालू सिंह जगदीश को कंधे पर बैठाकर उसे कॉलेज ले जाते हैं। जगदीश के गांव के आस पास कोई कॉलेज भी नहीं है। उसे स्कूल में 12वीं तक की पढ़ाई करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा था। उसने 12वीं तक की पढ़ाई गांव से 10 किलोमीटर दूर संडावता से की। भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में हायर सेकंडरी पास करने के बाद 2017 में उसने अपने गांव से 25 किमी दूर राजगढ़ के कॉलेज में एडमिशन लिया। जगदीश ने 12वीं में 59 प्रतिशत नंबर हासिल किए थे।

पिता कालू सिंह जगदीश के साथ कॉलेज जाते हैं और उसकी छुट्टी होने तक वहीं रुकते भी हैं। कालू सिंह के पास थोड़ी बहुत खेती तो है, लेकिन वह बंजर ही रह जाती है। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से वह खेती भी नहीं कर पाते हैं।

20 वर्षीय जगदीश का सपना हैं कि वह बड़े होकर आईएएस अफसर बनना चाहते हैं। किसी भी बेटे के लिए यह गर्व की बात होगी कि उसके बाप के कंधे ही उसका सहारा हैं। कालू सिंह ने बताया कि उन्होंने सरकार और प्रशासन से मदद के लिए कई बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। प्रशासन ने सिर्फ 50 फीसदी विकलांगता का प्रमाण पत्र बनाकर दे दिया है। जिसके भरोसे रहने का कोई मतलब नहीं है।

जगदीश और उनके पिता के इस जज्बे को हमारा गाजियाबाद की टीम सलाम करती है।

साभार- Your Story Hindi

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