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आवारा कुत्ते और बंदर अब बने एक बड़ी समस्या, नगर निगम सोया है गहरी नींद में

गाज़ियाबाद | शहर के हर इलाके में घूमते आवारा कुत्ते और बंदर अब एक बहुत बड़ी समस्या बन चुके हैं। जीटी रोड स्थित एमएमजी और संयुक्त जिला अस्पताल में इन दिनों एंटी रेबीज निशुल्क इंजेक्शन लगवाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। मगर इंजेक्शन लगाने का समय सुबह आठ बजे से 11 बजे तक ही होने के कारण अस्पताल प्रबंधन इन लोगों को मजबूरी में लौटा रहा है। लगातार कुत्तों के काटने के मामले बढ़ने व लोगों के शिकायत करने के बावजूद नगर निगम कुत्तों की नसबंदी नहीं कर रहा है और न ही बंदरों को पकड़ कर किसी दूसरे स्थान पर भेजने के लिए कोई कार्यवाही कर रहा है।

सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन निशुल्क होने के कारण यहां रोजाना सौ से ज्यादा लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। वहीं निजी अस्पतालों में इस इंजेक्शन की कीमत करीब 600 रुपये है। एमएमजी अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट एसपी वर्मा ने बताया कि अस्पताल में 6000 एंटी रेबीज इंजेक्शन मंगा लिए गए हैं। रोजाना यहां पर सौ से ज्यादा लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। वहीं संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि अस्पताल में रोजाना 80 से ज्यादा लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। अभी सात सौ एंटी रेबीज इंजेक्शन बचे हैं।

शहर की जानी-मानी पशु विशेषज्ञ डॉ. रेणु सिंह ने बताया कि कुत्ता व बंदर काटने पर 34 घंटे के अंदर ही पहला एंटी रेबीज इंजेक्शन लगना अनिवार्य है। इसके बाद तीन से पांच एंटी रेबीज इंजेक्शन और लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि अगर पीड़ित व्यक्ति को समय से सारे इंजेक्शन नहीं लगाए गए तो रेबीज का वायरस जान ले सकता है।
हमारा गाज़ियाबाद ने जब जन सुनवाई के माध्यम से निगम का ध्यान इस समस्या की ओर आकृष्ट कराया तो हमें जवाब मिला की पशु क्रूरता अधिनियम के कारण निगम आवारा कुत्तों और बंदरों के विरुद्ध कार्यवाही करने में नाकाम है। जबकि निगम यदि चाहे तो आवारा कुत्तों की नसबंदी कर उनकी संख्या को सीमित कर सकता है और जहां तक बंदरों का सवाल है, तो उनके लिए हिंडन नदी के तट पर फलदार वृक्ष लगाकर एक वानर वन बनाया जा सकता है।


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