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बच्चों ने छोड़ा साथ तो अधेड़ उम्र में इस प्रेमी जोड़े ने थामा एक दूसरे का हाथ, रचाई शादी

गाज़ियाबाद। हम जानते हैं कि 18 साल के बाद हर लड़की को अपना निर्णय स्वयं लेने का अधिकार मिल जाता है वहीं लडकों को भी 21 साल के बाद अपना निर्णय स्वयं लेने का अधिकार है तो फिर ये बच्चे अपने माता-पिता द्वारा स्वयं के लिए लिये गए निर्णय का विरोध कैसे कर सकते हैं? आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने स्वयं तकलीफों को दूर करने के लिए अधेड़ उम्र में अपना घर बसाया ।

21 फरवरी 2018 को ‘आशा ज्योति केंद्र’ में एक लड़की ने अपनी माँ जन्नत के अपहरण होने की खबर दी। उसका कहना था कि उसकी माँ काम करने के लिए एक व्यक्ति मोहम्मद फकीरा के साथ गई थी। उसने ये भी बताया कि उस व्यक्ति की एक कपड़े की दुकान गाज़ियाबाद में है।  उसे शक है कि उस व्यक्ति ने ही उसकी माँ का अपहरण किया है।

आशा ज्योति केंद्र कि काउंसलर प्रियांजली, उनकी टीम व पुलिस की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लड़की कि माँ के कॉल को  ट्रेस किया तो पता चला वो ग़ाज़ियाबाद में ही हैं। केंद्र ने जन्नत और मोहम्मद फकीरा को ऑफिस बुलाया। केंद्र में पहुँचने के बाद जन्नत ने बताया कि उन्होंने फकीरा से निकाह कर लिया है और वो साथ रहना चाहते हैं। लेकिन उनके बच्चे इसका विरोध कर रहे हैं जिसके विपरीत जाकर इन्होंने निकाह कर साथ रहने का फैसला किया।

जन्नत का कहना था कि ‘बच्चे जब बड़े हो जाते हैं तो उन्हें अपना निर्णय स्वयं लेने का अधिकार होता है तो हमें क्यों नहीं’ । बता दें कि जन्नत के पति की मृत्यु हो चुकी है, एक बेटी है जो शादीशुदा है और अपने ससुराल में खुश है। वहीं फकीरा की पत्नी भी नहीं रही, उनके तीन बेटे हैं जो दूसरी जगह पर अपना घर बसकर ख़ुशी से रह रहे हैं। फकीरा का कहना था कि घर में अकेले रहने में उन्हें बहुत परेशानी होती थी। तबियत ख़राब होने पर उन्हें खाना देने वाला भी कोई नहीं था।

चार महीने पहले ही उनकी मुलाकात जन्नत से हुई । एक दूसरे के बारे में जानने के बाद इन्होंने साथ रहने का फैसला लिया जिससे इनके बच्चे खिलाफ थे। केंद्र ने दोनों की बातों को सुनकर उनकी काउंसलिंग कर उनकी शादी रजिस्टर्ड करवा दी।  ताकि भविष्य में इनके बच्चे कभी इन्हें परेशान न कर पाएं।

 

 

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