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अथ श्री झुग्गी झोंपड़ी कथा

क्या आपको पता है कि सरकारी ज़मीनों को घेर कर बनायी गयी झुग्गियों में रहने वाले आधे से ज्यादा गरीब, किरायेदार होते हैं? क्योंकि सरकारी ज़मीनों को घेर कर झुग्गियां बनाना और उन्हें किराए पर देना भी एक बड़े मुनाफे वाला व्यवसाय है? इस काम में ज़्यादातर दबंग किस्म के लोग होते हैं, जिन्हें स्थानीय नेताओं का संरक्षण प्राप्त होता है। ये दबंग लोग गरीब प्रवासी मजदूरों से बिजली से लेकर पानी की सप्लाई यानि हर बात का पैसा लेते हैं। इन झुग्गियों में रहने वाले लोगों के वोटों पर भी इन दबंगों और छुटभैये नेताओं का कब्ज़ा होता है। यानी, झुग्गियों में रहने वालों को डरा कर या शराब और पैसे का लालच देकर उनके वोट डलवाए जाते हैं। इन गरीबों को बीमारी या ऐसी किसी मजबूरी के समय 10 से 15 प्रतिशत महीना की दर से पैसा भी उधार दिया जाता है। ये सारा कारोबार दबंगों और छुटभैये नेताओं के कंट्रोल में ही रहता है। झुग्गियों में रहने वालों की संख्या बहुत ज़्यादा होती है, मतलब कम जगह में हज़ारों वोट रहते हैं और इनकी कोई ख़ास मांगें भी नहीं होती हैं। यही कारण है कि झुग्गियां हमारे नेताओं को बहुत प्रिय होती हैं।

इन झुग्गियों को लेकर हर किसी को अपनी मजबूरी है। आम जन खुद को बेबस समझता है। नेताओं को वोट खोने का डर कुछ नहीं करने देता। दबंगों और छुटभैये नेताओं का तो पेट भरने का ज़रिया है ये। प्रशासन कुछ करे तो नेता लोग ट्रांसफर कराने से भी पीछे नहीं हटेंगे। और मीडिया तो है ही जनता का हमदर्द या कहें कि पापुलिस्ट तो उसे क्यों कुछ गलत लगेगा?

लेकिन समस्या का समाधान है, और हम सब के पास है क्यों कि इस समस्या के होने में हम सभी का हाथ है। समाधान है कि नेता और सरकारें धरातल पर ईमानदारी से काम करना शुरू करें और एक बार चुने जाने के बाद अगली बार फिर से चुने जाने का लालच छोड़ कर हर वो काम करें जो जनता के हित में है। भले ही उस काम से कुछ लोग नाराज़ हो जाएँ पर दूरगामी शुभ परिणाम लाने के लिए लोगों की फौरी नाराजगी लेना कोई नुकसान का काम नहीं है। आप नेता है सो आगे बढ़कर लोगों को सही राह दिखाएँ ना कि अपने वोटर्स से डरकर उनके पिछलग्गु बने रहें।

प्रशासन के अधिकारियों को चाहिए कि वो अपने ट्रांसफर से ना घबराए और पूरी कर्तव्यनिष्ठा से अपनी जिम्मेवारी को निभाएं। पुलिस और प्रशासन की ढील के बिना ये झुग्गी झौपड़ी का व्यवसाय चल ही नहीं सकता। अधिकारियों को आपसी एकता भी रखनी होगी ताकि किसी कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी का गलत कारणों से ट्रांसफर करने का दुस्साहस कोई वोटों का भूखा नेता ना कर पाए। मीडिया भी अब अपना रोल बदल कर काम करे। केवल खबर देने के स्थान पर खबर के असर के लिए भी उसे काम करना होगा। इस काम के लिए मीडिया को निंदक से उपदेशक भी बन जाना पड़े तो कोई हर्ज़ नहीं। वैसे भी आज का मीडिया लोगों को न्याय दिलवाने और दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने का काम करने लगा है। आम जन को भी इस यज्ञ में बढ़ चढ़ कर भाग लेना होगा। आखिर झुग्गियों में रहने वाले लोग हमारी जिंदगी के अहम लोगों में से ही हैं। झुग्गी झोपडी में रहने वाला कोई हमारे घर, दुकान या फैक्टरी में काम करता है तो कोई हमारा घर बनाने और रिपेयर करने का कम करता है। हम सब इसी शहर के निवासी हैं तो एक दूसरे से अलग कैसे हो सकते हैं। आप और हम अपने आस पास की गरीबी और बदहाली को दूर करके ही चैन से रह सकते हैं।

अंत में आप को आमंत्रित करना चाहूँगा कि इस झुग्गी झौपड़ी कथा में अपने रोल को पहचानिए और अपनी सकारात्मक भूमिका को बड़े ज़ोरदार ढंग से निभाइए। आप चाहे आम आदमी हैं, प्रशासनिक अधिकारी, मीडिया बंधू या कोई नेता, मेरा आप से यही निवेदन है कि हम अगर ठान लेंगे तो बदलाव ज़रूर आयेगा।

धन्यवाद ।
आपका अपना
अनिल कुमार