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छोटी शिपमेंट्स के लिए जरूरी नहीं होगा ई-वे बिल, सरकार कर रही है संशोधन की तैयारी

गाज़ियाबाद | केंद्र सरकार ई-कॉमर्स और एफएमसीजी कंपनियों को ई-वे बिल में राहत देने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत एक ही राज्य के अंदर आपूर्ति की बड़ी खेप में शामिल छोटे ऑर्डरों के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के लिए ई-वे बिल की जरूरत नहीं होगी। नई योजना के तहत ई-वे बिल राज्य के अंदर 50,000 रुपये से अधिक मूल्य की वस्तुओं तक ही समिति होगा। शनिवार को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में उद्योग के लिए अनुपालन को सुगम बनाने के मकसद से ई-वे बिल में इस तरह के बदलाव पर निर्णय हो सकते हैं। लेकिन एक ही राज्य के भीतर माल की आवाजाही के लिए इस तरह की छूट नहीं मिलेगी।
प्रक्रिया से जुड़े एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि उद्योग की मांग के अनुरूप ई-वे बिल नियम में बदलाव किया जाएगा, जिससे राज्य के अंदर छोटे-छोटे ऑर्डरों के लिए कई सारे ई-वे बिल की जरूरत नहीं होगी। इस कदम का मकसद कंपनियों के समक्ष आने वाली कठिनाइयों को दूर करना है। दूसरे शब्दों में अगर कोई ट्रक 20 ऑर्डर लेकर आपूर्ति के लिए निकलता है और उनमें से 4 ऑर्डर की कीमत 50,000 रुपये से अधिक हो तो केवल चार ई-वे बिल तैयार करने की ही जरूरत होगी। ऐसे में आईफोन और अन्य कीमती उपकरणों के लिए ई-कॉमर्स कंपनियों को ई-वे बिल की अब भी जरूरत होगी। अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) से बंदरगाह तक के निर्यात पर भी ई-वे बिल से छूट मिलेगी।
ई-वे बिल की वैधता 100 किलोमीटर के लिए 24 घंटे की होगी। हालांकि सरकार 24 घंटे से अधिक समय तक ट्रक के अटकने की स्थिति में ई-वे बिल की वैधता को भी बढ़ा सकती है। अधिकारी ने कहा, ‘लेकिन इस असाधारण परिस्थिति में ही जारी किया जाएगा।’ जीएसटी संग्रह में कमी को देखते हुए जीएसटी परिषद ने ई-वे बिल को अंतर-राज्यीय आवाजाही के लिए 1 फरवरी से और राज्य के अंदर 1 जून से लागू करने का निर्णय किया था। लेकिन पहले ही दिन पोर्टल के क्रैश करने की समस्या के लिए इसे टाल दिया गया था।
इसके साथ ही जीएसटीआर 3बी रिटर्न भरने की अवधि को बढ़ाकर 6 माह किया जा सकता है। नवंबर में परिषद ने करदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जीएसटीआर 3बी को 31 मार्च तक के लिए टाल दिया था। अब उम्मीद की जा रही है कि शनिवार की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। परिषद की बैठक में बिलों के मिलान तथा रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा होगी। तीन रिटर्न – जीएसटीआर 1, 2 और 3 तथा सारांश रिटर्न जीएसटीआर 3बी की जगह एक ही बार में रिटर्न की प्रक्रिया पर भी विचार-विमर्श किया जा सकता है।

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