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अभी तक नहीं तैयार हुई बंदिंयों की स्वास्थ्य रिपोर्ट, बढ़ सकती है मुख्य सचिव की मुसीबतें

गाजियाबाद। डासना कारागार में भी कैदियों के इलाज की बेहतर व्यवस्था नहीं हैं। यहां समय-समय पर कैदियों की मौत की सूचना आती है। जेल में कैदी की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल ही लेकर आना पड़ता है। कई बार कैदी इसकी शिकायत कर चुके हैं। हालत ये है कि जेल में महिला कैदियों के उपचार के लिये ना तो कोई महिला डाक्टर है और ना ही कोई महिला नर्स है।

जेल प्रशासन इस मामले में सीएमओ को पहले ही पत्र लिख चुका है। जेल अस्पताल में इलाज के लिये सुविधाओं  का अभाव है। जेल प्रशासन द्वारा समय -समय पर इस सबंध में पत्र लिखे जा चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि स्वंय सरकारी अस्पतालों में ही पहले से डॉक्टरों की कमी है तो ऐसे में जेल के लिये डॉक्टर कहां से लायें।

जिले में डीएम को सीएमओ के परामर्श पर विशेषज्ञ डाक्टरों की एक टीम बनानी होगी। यह टीम प्रत्येक 15 दिन के अंतराल पर कारगार की विजिट करेगी और जेल में बंद कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण करके उपचार की सुविधा देगी। जेल अधीक्षक के द्वारा इस की रिपोर्ट जिलाधिकारी तथा सीएमओ को उपलब्ध करायी जायेगी। इसके बाद मंडल स्तर पर भी अपर निदेशक हैल्थ की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी ।

यह कमेटी महीने में एक बार विजिट करेगी और गंभीर रूप से बीमार कैदियों का उपचार करेगी। इस कमेटी में भी विशेषज्ञ डाक्टर शामिल होंगे। जब जनपद स्तर के अधिकारी जेलों में विजिट करेंगे तब मुख्य चिकित्सा अधिकारी अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे। सीएमओ ही जेल में कारागार अस्पताल का निरीक्षण करेंगे और बीमार कैदियों से उनके उपचार के संबंध में जानकारी प्राप्त करेंगे।

अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में वह इस जानकारी का भी उल्लेख करेंगे। इसके अलावा प्रदेश स्तर पर भी महानिरीक्षक जेल की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन होना है। इस कमेटी में कारागार मुख्यालय के प्रतिनिधि के साथ हैल्थ महानिदेशक और उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि को भी सदस्य के रूप में रखा जाना है। कमेटी जो भी रिपोर्ट कैदियों के स्वास्थ्य को लेकर जारी करेगी उसकी मानिटरिंग भी शासन स्तर से होगी।

 

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