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अनाथालय प्रबंधन की लापरवाही से छह बच्चे आए खसरा की चपेट में

गाज़ियाबाद। गोविंदपुरम स्थित एक अनाथालय प्रबंधन की लापरवाही से उसमें रहने वाले छह बच्चे खसरा बीमारी की चपेट में आ गए हैं। इन सभी बच्चों को एमएमजी अस्पताल के बच्चा वॉर्ड में भर्ती कराया गया है। इसमें एक बच्चे की हालत गंभीर है। अन्य पांच बच्चे खतरे से बाहर हैं। अस्पताल में भर्ती बच्चों ने भी अनाथालय प्रबंधन पर उन पर ध्यान न देने का आरोप लगाया है।

एमएमजी अस्पताल में गोविंदपुरम के एक अनाथालय के छह बच्चों को बीते सात मार्च को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था। सभी बच्चे खसरे के कारण बेहद कमजोर हो चुके थे। आनन-फानन में अनाथालय प्रबंधन ने उन्हें एमएमजी अस्पताल में भर्ती करवाया। यही नहीं बच्चों को भर्ती करवाने के बाद से अनाथालय प्रबंधन का कोई भी सदस्य बच्चों को देखने नहीं आया। ऐसे में अस्पताल के चिकित्सकों ने बच्चों का इलाज शुरू किया।

इलाज के दौरान जब बच्चों से चिकित्सकों ने बात की तो बच्चों ने बताया कि सबसे पहले अनाथालय की एक लड़की को खसरा हुआ था। इसके बावजूद अनाथालय प्रबंधन ने खसरा बीमारी से ग्रस्त लड़की को अन्य बच्चों से अलग नहीं किया। ऐसे में देखते ही देखते अन्य बच्चे भी इसकी चपेट में आ गए। बच्चों की मानें तो अभी अनाथालय में कुछ अन्य बच्चे भी इसकी गिरफ्त में हैं। जिनका इलाज दूसरे अस्पताल में चल रहा है।

आइसोलेशन वॉर्ड में चल रहा इलाज

खसरा बीमारी से ग्रस्त सभी छह बच्चों का इलाज आइसोलेशन वॉर्ड में रखकर किया जा रहा है। सभी बच्चों की उम्र दस साल से कम है। इन बच्चों में एक बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है। अन्य बच्चे खतरे से बाहर हैं। इन बच्चों पर अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ व नर्सों की टीम लगातार नजर रख रही है। चिकित्सकों की मानें तो मासूमों को पूरी तरह से ठीक होने में कम से कम दस दिन से ज्यादा का समय लगेगा। गंभीर बच्चे को ठीक होने में अन्य बच्चे से थोड़ा ज्यादा समय लगेगा।

अनाथालयों के बच्चों को नहीं लगवाए जाते टीके

गाजियाबाद के अनाथालयों में चार साल से लेकर दस साल के ऊपर तक के अनाथ बच्चों को रखा जाता है। इन बच्चों को अनाथालय प्रबंधन की ओर से जरूरी टीके जैसे-खसरा, पोलियो, हैपेटाइटिस, बीसीजी व पैंटावेलेंट नहीं लगवाए जा रहे हैं। यही नहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अनाथालयों में जाकर बच्चों का टीकाकरण नहीं करती। अस्पताल में गोविंदपुरम के छह बच्चे भर्ती हैं। जिनका नाम वैष्णवी, श्याम, जाह्नन्वी,निशा,रिनू और हिमांशु है। ये बच्चे अपने अनाथालय का नाम नहीं बता पा रहे हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन अनाथालय प्रबंधन से संपर्क करने का प्रयास कर रहा है।