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कुछ हम भी सीखें: युवक ने दहेज़ के बदले मांगे 101 पौधे

गाज़ियाबाद। सुराना गांव का एक सगाई समारोह उस वक्त चर्चा में आ गया, जब ‘दूल्हे’ ने दहेज में घरेलू सामान या कैश न लेकर 101 फलदार पौधे लिए। यहीं नहीं, वधू पक्ष ने मिलाई में रुपये की जगह वर पक्ष के लोगों को पौधे भेंट किए। पौधरोपण, स्वच्छता और दहेज रहित शादी के लिए यह विवाह मिसाल बनने जा रहा है। दूल्हा बनने जा रहे सुराना गांव निवासी भरत ने यह अनोखी पहल की है। भरत का कहना है कि 12 मार्च को शादी है और वह व उसकी भावी पत्नी मोनिका वृक्ष के फेरे लेकर विवाह बंधन में बधेंगे। साथ ही पौधरोपण का संकल्प लेंगे। यह निर्णय दोनों ने मिलकर किया है।

मूलचंद आर्य सुराना गांव में परिवार सहित रहते हैं। परिवार में पत्नी शकुंतला, बेटी अंजना, गीता, उमा और बेटा भरत व यशवीर है। मूलचंद के बेटे भरत की शादी मोनिका पुत्री मूलचंद निवासी विवेकानंद नगर गाजियाबाद से तय हुई। शनिवार को सुराना गांव मार्ग स्थित डंगुर सिंह फार्म हाउस में भरत आर्य का सगाई समारोह था। जहां एक ओर दहेजलोभी लोग महिलाओं को प्रताड़ित करते है। वहीं, दूसरी तरफ भरत आर्य ने दहेज रहित विवाह का फैसला लिया। भरत ने बताया कि वह वधू पक्ष से कोई सामान नहीं लेंगे। शनिवार को सगाई समारोह में 101 फलदार पौधे लिए गए। भरत ने बताया कि वह प्रत्येक शनिवार व रविवार को गांव आकर हिंडन नदी में साफ-सफाई अभियान चलाते है। साथ ही पानी बचाने के लिए लोगों को जागरूक करते हैं।

सगाई में भरत को मोनिका के भाई ने सोने की चेन देनी चाही, लेकिन उन्होंने लेने से इंकार कर दिया। साथ वधू पक्ष से आग्रह किया कि वे सोने की चेन के कीमत के बराबर पौधे खरीदकर हिंडन नदी के किनारे लगवा दें। भरत आर्य ने बताया कि वह अपनी पत्नी को पौधे का गिफ्ट देंगे और शादी के दिन मिलकर वह पौधा लगाएंगे।

जैपनिज लैंग्वेज का जापान से किया कोर्स
भरत ने 12वीं की परीक्षा के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से जैपनीज लैंग्वेज का डिप्लोमा किया और 2010 में दो साल का एडवांस कोर्स जापान से किया। कुछ समय वहां जॉब की। बाद में बैंगलोर की एक कंपनी में मैनेजर के पद पर काम किया। अब वह गुड़गांव में आईवीएन कंपनी में टैक्नीकल पद पर तैनात है। मोनिका एमकॉम हैं और लाइब्रेरियन का कोर्स भी किया है।

 

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