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शाबाश इंडिया:-बिना हाथ के सैंकड़ों मरीजों का सहारा बनी हैं 19 वर्षीय पिंची

नई दिल्ली। सपनों की उड़ान उड़ने के लिए हौसले बुलंद होने चाहिए। आज हम आपको बताने जा रहे हैं पिंची गोगोई के हौसले के बारे में। पिंची गोगोई उन लोगों के लिए मिसाल हैं जो शारीरिक अक्षमता के चलते हार जाते हैं।

पिंची के जन्म से ही हाथ नहीं हैं। लेकिन 19 वर्षीय पिंची ने अपनी भावनाओं को रुकने नहीं दिया और सभी कठिनाइयों के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहीं। उन्होंने सभी बाधाओं को चुनौती दी और अब गुवाहाटी में नेमेकेयर सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल में ‘मे आई हेल्प यू (सहायता डेस्क)’ डेस्क की प्रभारी हैं। शारीरिक रूप से असक्षम होने के बावजूद भी पिंची नेमेकेर सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में हेल्प डेस्क पर प्रभारी के रूप में अपना काम बखूबी करती हैं।

पिंची हेल्प डेस्क पर मरीजों को अस्पताल और बीमारी से जुड़ी जानकारियां देती हैं। पिंची की ये जॉब उन्हें बड़ी संख्या में लोगों की सेवा करने में मदद करती है। पिंची हर रोज मरीज का विवरण लिखना, कॉल करना, अन्य आधिकारिक व लिखा पढ़ी का काम करती हैं। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि पिंची के तो हाथ ही नहीं हैं तो वह ये सब कैसे कर लेती होंगी? जी हां, आपने सही सोचा। दरअसल पिंची ये सब काम पैरों से करती हैं। अपने पेशेवर कौशल को चलाने में माहिर होने के अलावा, पिंची अपने पैरों का उपयोग करके चित्रों को भी स्केच कर सकती हैं।

पिंची ही नही बल्कि देश में तमाम ऐसे लोग हैं जो अपने हौसलों और अपनी इच्छाशक्ति के दम पर अपने सपनों को पूरा कर रहे हैं। ये लोगों समाज के आदर्श हैं। जीवन को कैसे बिना निराश हुए और सारी बाधाओं को पार करते हुए जिया जाता है, ये लोग इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण हैं।

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