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31 मार्च तक लाल श्रेणी के उद्योगों को लगाना होगा प्रदूषण सूचक

गाज़ियाबाद। वायु प्रदूषण की स्थिति में सुधार के लिए उद्योगों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषणकारी उद्योगों में शामिल लाल श्रेणी के उद्योगों को 31 मार्च तक निगरानी के लिए ऑनलाइन करने को कहा है। इसके लिए उद्योगों को सीएसईएमएस प्रणाली लगानी होगी। जनपद में ऐसे उद्योगों की संख्या 300 है, जिनमें 31 मार्च तक यह प्रणाली लगानी अनिवार्य है।

वायु प्रदूषण के लिहाज से एनसीआर में गाज़ियाबाद की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। एनजीटी के आदेश के बाद बीते चार महीने से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत प्रशासन वायु प्रदूषण की स्थिति में सुधार के लिए काम कर रहे हैं। इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाहनों, उद्योगों और संस्थाओं पर कार्रवाई की जा रही है।

गाज़ियाबाद को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि प्रदूषणकारी उद्योगों में शामिल लाल श्रेणी के उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन प्रणाली (सीएसईएमएस) लागू की जाए। इससे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लाल श्रेणी के उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन पर लगातार ऑनलाइन निगरानी रख सकेगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक उद्योगों की चिमनी में ऑनलाइन निगरानी के लिए मशीन लगाई जाती है, जिसे ऑनलाइन जोड़ा जाता है। इसके बाद उद्योग से होने वाले उत्सर्जन की जांच की जा सकती है।

क्या है उद्योगों की लाल श्रेणी-

प्रदूषण की दृष्टि से उद्योगों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इन्हें लाल, नारंगी और हरी श्रेणी दी गई है। लाल श्रेणी में सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग आते हैं, जबकि नारंगी में उससे कम प्रदूषण करने वाले उद्योग शामिल हैं। लाल श्रेणी में खाद, शुगर, डाई, रिफाइनरी, रंगाई, पेट्रो केमिकल, सीमेंट, आयरन एवं स्टील प्लांट, धातुओं का प्रयोग करने वाली इकाई समेत 60 प्रकार के उद्योग आते हैं।

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