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बिजली व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में कर्मचारी हुए लामबंद, तीन दिनों से जारी है आंदोलन

गाज़ियाबाद | उत्तर प्रदेश सरकार के लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ व मुरादाबाद सर्किल की बिजली व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने के फैसले के खिलाफ कर्मचारी और इंजीनियर लामबंद हो गए हैं। निजीकरण की निविदा जारी होने के बाद कर्मचारी व इंजीनियर पिछले तीन दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। बिजली उपभोक्ताओं ने भी निजीकरण के फैसले को विद्युत नियामक आयोग के फैसले के खिलाफ बताया है। उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पांच शहरों के बिजली वितरण को निजी हाथों में देने से पहले आगरा में वितरण का काम देख रही टारंट पावर के काम की समीक्षा की मांग की है। इस संबंध में समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भी लिखा है।

पावर इंजीनियर्स महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव शैलेंद्र दुबे ने पांच शहरों की बिजली व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने की नीति और नीयत पर सवाल खड़े किए हैं। महासंघ ने दावा किया कि जिन पांच शहरों में बिजली के निजीकरण का फैसला लिया गया है, उन शहरों में बिजली राजस्व में वृद्धि और राजस्व प्राप्ति आगरा में टॉरंट से मिलने वाले राजस्व से अधिक है, ऐसे में निजीकरण का कोई ठोस आधार नहीं है। दुबे ने कहा कि आगरा में टॉरंट के पिछले 8 साल के कार्यों की समीक्षा किसी निष्पक्ष ऑडिटर से कराई जाए।

संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि निजी कंपनियों का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षा से ऑडिट कराने पर राज्य सरकार सरकार तैयार नहीं है, इसलिए बड़े घोटालों को अंजाम देने के लिए बड़े औद्योगिक एवं वाणिज्यिक शहरों में बिजली वितरण का निजीकरण किया जा रहा है।

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