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साइकोमेट्रिक टेस्ट- कामकाजी महिलाओं को मिलेगा नया रास्ता

नई दिल्ली। महिलाओं की उद्यमशीलता को देखते हुए भारत में पहली बार कामकाजी, कारोबारी और नया कारोबार शुरू करने की इच्छुक महिलाओं के लिए साइकोमेट्रिक टेस्ट की शुरुआत की गयी है। यह टेस्ट महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें उनकी कमियों से भी रुबरु करायेगा ताकि वे खुद को अच्छी तरह तैयार कर पायें। महाराष्ट्र चैंबर्स ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर के महानिदेशक डॉ अनंत सरदेशमुख के मुताबिक, नये कारोबार में निवेश से महिलाओं की उद्यमशीलता का आंकलन संभव हो पायेगा।

इस टेस्ट की शुरूआत पुणे में की गयी है। जानकारी के मुताबिक,“ इस टेस्ट का उद्देश्य महिलाओं की उद्यमशीलता की पहचान करना और उनमें इस कौशल को विकसित करना है। इस टेस्ट के बाद उन्हें यह पता रहेगा कि वे नया कारोबार शुरू करने के लिए तैयार हैं या उनमें अभी कोई कमी है। इससे उन्हें पता चल पायेगा कि क्या वाकई वे उद्यमी बन सकती हैं। चैंबर इन महिलाओं को उनका कारोबार शुरू करने और उसने कारोबार को बढाने में मदद करेगा। यह टेस्ट क्षमता, झुकाव और निजी गुणों का आंकलन करता है।

सफल कारोबार के लिए जरूरी कौशल के लिए विकास योजना तैयार की गयी है। यह टेस्ट तीन घंटे का है। यह मराठी और अंग्रेजी दो भाषाओं में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि विभिन्न कारोबारों के लिए इस टेस्ट की काफी मांग हो रही है। हमारा दूसरा बैच इस माह की टेस्ट की लिए तैयार है।

क्या है साइकोमेट्रिक टेस्ट..?

साइकोमेट्रिक टेस्ट में उम्मीदवार की परीक्षा तीन स्तर पर होती है। पहला, एबिलिटी टेस्टिंग, एप्टीट्यूड टेस्टिंग और पर्सनैलिटी असेस्मेंट। एक तरह से इस टेस्ट के जरिए कंपनियां और संगठन संभावित कर्मचारी की काम और संस्थान के संबंध में व्यवहार अनुकूलता को परखते हैं। इसमें एक कर्मचारी की सोचने-समझने की क्षमता, टीम के रूप में काम करने की योग्यता और उम्मीदवार की निजी वरीयता का आकलन करते हैं। एबिलिटी टेस्ट में एक तरह से सामान्य क्षमता की जांच होती है, जिसमें संख्यात्मक, मौखिक, गैर-मौखिक और स्थान संबंधी जानकारी का आकलन किया जाता है।

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