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22 वर्षीय अरुणा ने रचा इतिहास, बन गई पहली भारतीय जिमनास्ट

नई दिल्ली। हैदराबाद की अरुणा बुद्धा रेड्डी जिमनास्टिक विश्व कप में व्यक्तिगत पदक जीतने वाली पहली भारतीय जिमनास्ट बन गईं। पिछले महीने मेलबर्न में हुए जिमनास्टिक वर्ल्ड कप में 22 वर्षीय अरुणा रेड्डी ने अपना बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए , कांस्य पदक पर कब्जा कर लिया। इस स्पर्धा में पदक जीतने वाली अरुणा पहली भारतीय जिमनास्ट बन गई हैं ।

जिमनास्टिक वर्ल्ड कप के महिला वॉल्ट स्पर्धा में अरुणा ने 13.649 का अंक बनाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। वहीं स्लोवानिया की जासा कैस्लेफ (स्वर्ण पदक) और ऑस्ट्रेलिया की एमिली वाइटहेड (रजत पदक) से पीछे रहीं। फाइनल में कैस्लेफ ने 13.800, जबकि वाइटहेड ने 13.699 अंक हासिल किए। भारत की प्रांती नायक ने 13.416 अंक हासिल किए। वह इस स्पर्धा में छठे स्थान पर रहीं।

यह अरुणा का पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है। हालांकि, वह 2013 वर्ल्ड आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स चैम्पियनिशप, 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले चुकी हैं। जबकि इस उपलब्धि को हासिल करने से पहले अरुणा ने 2017 में एशियाई चैम्पियनशिप की वॉल्ट स्पर्धा में छठा स्थान हासिल किया था।

महिला सशक्तिकरण की सोच न केवल महिलाओं की ताकत और कौशल को उनके दुखदायी स्थिति से ऊपर उठाने पर केंद्रित करती है बल्कि साथ ही यह पुरुषों को महिलाओं के संबंध में शिक्षित करने और महिलाओं के प्रति बराबरी के साथ सम्मान और कर्तव्य की भावना पैदा करने की आवश्यकता पर जोर देती है। यदि सभी महिलाएं अपने अधिकार और ताकतों से अवगत हो जाये तो आज हर घर में अरुणा बुद्धा रेड्डी जैसी भारतीय जिमनास्ट पैदा होंगी। 

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