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शाबाश: ये शख्स अपने बाग़ में करता है कटहल की 210 प्रजातियों की खेती

केरल। देश के बाकी हिस्सों के लिए, कटहल एक नियमित फल हो सकता है जो क्षेत्रीय व्यंजनों और कन्सेक्शन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, लेकिन एक मलयाली के लिए, यह केवल अन्य फल नहीं है बल्कि एक भावना है। और यह भावना इतनी गहरी है कि हाल ही में, राज्य प्रशासन ने आगे बढ़ कर इसे अपने राज्य के फल के रूप में घोषित कर दिया। हालांकि, इस राज्य के लोगों को यह नहीं पता था कि इस फल की 200 से भी अधिक किस्में होती हैं, और चककंपुझा कट्टकैम के एक शहर पाला में एक व्यक्ति इन पौधों का संग्रह और पोषण कर रहा है।अब तक, उन्होंने अपने बाग में इस फल के विभिन्न 210 प्रकारों को लगाने में कामयाबी हासिल की है।

थॉमस फल और सब्जियों पर छिड़के जाने वाले कीटनाशकों की मात्रा से परेशान थे जो की न केवल बाजारों तथा उन फलों और सब्जियों पर किया जा रहा था जो रसोई के पिछवाड़े में उगाए जाते हैं। जब उन्हें एहसास हुआ कि केवल कटहल एकमात्र ऐसा फल था जिसे कृत्रिम विकास बूस्टर या रासायनिक कीटनाशकों की ज़रूरत नहीं थी, तो उन्होंने इसे संरक्षित करने का फैसला किया। वास्तव में, कटहल एक ऐसा फल है जिसका वृक्ष अपने से बढ़ता है, और जिसे केवल कुछ प्रारंभिक पोषण की आवश्यकता होती है।

अपने फैसले के बाद, उन्होंने हर अवसर पर उन्होंने कटहल के पौधों को इकट्ठा करना शुरू किया और उभरते हुए तकनीक के माध्यम से उन्होंने 1.5 एकड़ में फैले अपने बाग में यह फल लगाना शुरू कर दिया। वह बाग मूल रूप से एक रबड़ का बागान था, जिससे थॉमस ने तब छुटकारा पा लिया जब उन्होंने जैफफ्रुटों के संरक्षण के बारे में विचार किया। पौधे उगाने के बाद वो उन्हें कंटेनरों में संरक्षित कर देते है।दुर्भाग्य से, थॉमस द्वारा मेहनत किए जाने के बावजूद कई किस्में समय-समय पर समाप्त हो गईं, जिसने आगे चल कर कटहल के संरक्षण के लिए इनकी महत्वाकांक्षा को और भी ज्यादा मजबूत कर दिया।आज, थॉमस के बाग के पूरे क्षेत्र में केवल ‘प्लावा’ जिसे कि केरल में कटहल पेड़ के रूप में जाना जाता है।

73 साल की उम्र में, थॉमस अपने संरक्षण प्रयासों को जारी रखने का इरादा तब तक रखते हैं, जब तक वह कर सकते हैं और यहां तक ​​कि इस कटहल के बगान का सपना पूरा करने के लिए दूर दूर तक यात्रा भी करते हैं। इनके इस जज़्बे को हमारा गाज़ियाबाद की ओर से सलाम।

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