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भारत की पहली महिला डॉक्टर थीं आनंदीबाई जोशी, 9वर्ष की उम्र में हो गई थी शादी

नई दिल्ली। भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी की कहानी दिल को छू लेने वाली है ब्याह के बाद उनका नाम आनंदी गोपाल जोशी पड़ा आईये जानते हैं डॉक्टर बनने की उनकी कहानी-

पुणे में जन्‍मी आनंदीबाई जोशी की शादी नौ साल की उम्र में करीब 25 साल के गोपालराव जोशी से हुई थी। गोपालराव की आनंदी से शादी की शर्त ही यही थी कि वे पढ़ाई करेंगी आनंदी के मायके वाले भी उनकी पढ़ाई के ख़िलाफ थे ब्याह के वक्त आनंदी को अक्षर ज्ञान भी नहीं था गोपाल ने उन्हें क,ख,ग से पढ़ाया नन्ही सी आनंदी को पढ़ाई से खास लगाव नहीं था उस दौर में मिथक ये थी कि जो औरत पढ़ती है उसका पति मर जाता है। आनंदी को गोपाल डांट-डपट कर पढ़ाते एक दफा उन्होंने आनंदी को डांटते हुए कहा, तुम नहीं पढ़ोगी तो मैं अपना मज़हब बदलकर क्रिस्तानी बन जाऊंगा। गोपाल को ज़िद थी कि अपनी पत्नी को ज़्यादा-से-ज़्यादा पढ़ाऊं। 

अक्षर ज्ञान के बाद गोपाल, आनंदी के लिए अगली कक्षा की किताबें लाए फिर वे कुछ दिन के लिए शहर से बाहर चले गए जब वापस लौटे तो देखा कि आनंदी घर में खेल रही थी वे गुस्से से बोले कि तुम पढ़ नहीं रही हो आनंदी ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया, जितनी किताबें थी सब पढ़ चुकी। आनंदी के प्रति गोपाल के इस विचार को देखकर घरवाले सभी उनसे नाराज रहने लगे। लेकिन फिर भी गोपाल ने ब्राह्मण-समाज का तिरस्कार झेला और सात समंदर पार अपनी पत्नी को अमेरिका भेजकर उसे पहली भारतीय महिला डॉक्टर बनाने का इतिहास रचा।

आनंदीबाई मेडिकल क्षेत्र में शिक्षा पाने के लिए अमेरिका गईं और साल 1886 में (19 साल की उम्र में) उन्होंने MD की डिग्री हासिल कर ली वो एमडी की डिग्री पाने वाली और पहली भारतीय महिला डॉक्‍टर बनीं डिग्री लेने के बाद आनंदीबाई वापस देश लौटीं लेकिन उस दौरान वे टीबी की शिकार हो गईं दिन पर दिन सेहत में गिरावट के चलते 26 फरवरी 1887 को 22 वर्ष की आयु में आनंदी का निधन हो गयाआनंदीबाई के जीवन पर कैरोलिन वेलस ने 1888 में बायोग्राफी लिखी जिसपर ‘आनंदी गोपाल’ नाम से सीरियल बना और उसका प्रसारण दूरदर्शन पर किया गया

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