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सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी करने वाली माँ-बेटी को 17 माह कैद

गाज़ियाबाद। सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना सिंह की अदालत ने ठग मां-बेटी को 17 माह कैद की सजा सुनाई। साथ में दोनों पर 42-42 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। आरोप सरकारी नौकरी लगाने के नाम पर लोगों के ठगी करने का है।

सीबीआई के लोक अभियोजक ने बताया कि सरकारी नौकरी पाने के इच्छुक लोगों को झांसा देने के लिए वर्ष 2013 में मां-बेटी ने मैसर्स इंडियन प्रोजेक्ट एंड कंस्ट्रक्शन कॉपरेटिव लिमिटेड (आइपीसीएल) और मैसर्स नेशनल फारमर्स कॉपरेटिव (नेफको) दो कॉपरेटिव सोसायटी बनाई। लीना सिंह आइपीसीएल और उनकी बेटी नेफको की चेयरमैन थी। लोगों को झांसा देने के लिए मां-बेटी ने इन दोनों सोसायटियों को सरकारी संस्था बताया और इनमें नौकरी के लिए विभिन्न समाचार पत्र व अन्य माध्यमों से खूब प्रचार-प्रसार किया।

देश भर से काफी संख्या में बेरोजगार लोगों ने इनके झांसे में आकर आवेदन किया और ठगी का शिकार हुए।
उत्तराखंड के रहने वाले एक पीड़ित सुजान सिंह नेगी ने मामले की सीबीआई जांच के लिए नैनीताल हाईकोर्ट में एक पीटीशन दायर की। उस पर सुनाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए। इस मामले में सीबीआई ने लीना सिंह, उनकी बेटी और दोनों की सोसायटियों समेत 13 के खिलाफ चार्जशीट दी है।

इनके अलावा मामले में उमेश वीर विक्रम सिंह, सुनील कुमार, नागेंद्र पाल, निशांत कुमार, सुधांशु भारद्वाज, आनंद कुमार सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, विवेक सिंह व गुरमीत सिंह को आरोपित किया गया है। लोक अभियोजक के मुताबिक ट्रायल के दौरान लीना सिंह व उनकी बेटी ने अदालत में जुर्म कबूला। शनिवार को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना सिंह की अदालत ने लीना सिंह व उनकी बेटी को 17 माह कारावास की सजा सुनाते हुए प्रत्येक पर 42 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।

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