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क्यों न गाज़ियाबाद में भी लागू हो स्वचालित ड्राइविंग टेस्ट प्रणाली

गाज़ियाबाद। जब से दिल्ली में स्वचालित ड्राइविंग परीक्षण की शुरुआत हुई है तब से, टेस्ट पास करने वालों की संख्या में 50% की गिरावट आई है। इतना ही नहीं, ड्राइविंग लाइसेन्स आवेदन करने वाले अभ्यार्थियों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है।

स्वचालित ड्राइविंग लाइसेन्स सिस्टम की शुरुआत करीब 2 हफ़्तों पहले सराए काले खां के पास हुई थी। इस प्रणाली के अंतर्गत ऐसी व्यवस्थाएं हैं जिनसे सेन्सर द्वारा ये पता लगाया जा सकता है कि कार कहीं भिड़े नहीं साथ ही उतार चढ़ाव की जगहों पर ड्राइविंग स्किल्स चेक करने के लिए उसमें सेंसर आधारित सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इससे पहले, यह प्रशिक्षण साकेत के पास 1 किलोमीटर की जगह पर किया जाता था जो कि मैनुअल था, जिसमें केवल ज़रूरी आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर आधिकारिक जाँच की जाती थी।

संख्या में गिरावट के पीछे का एक कारण यह भी है कि नई व्यवस्था में बिचौलियों की भूमिका कम हो गई है। इससे पहले की प्रणाली एकपक्षीय थी और कई चीजें अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करती थीं। ड्राइविंग टेस्ट क्वालीफाई करने के लिए उपस्थित होने वाले व्यक्ति को उन 8 पटरियों को कुशलतापूर्वक पार करना होंगा जो वैसे तो 12 फीट चौड़ी हैं लेकिन कई जगहों पर उसकी चौड़ाई घट कर 10 फीट हो जाती है।

इस संबंध में जब हमने गाज़ियाबाद के एआरटीओ विश्वजीत सिंह से बात की तो उन्होंने बताया की ऐसी ही प्रणाली गाज़ियाबाद में भी शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया है। हालाँकि अभी यहाँ होने वाले ड्राइविंग टेस्ट मैन्युअल हैं लेकिन जल्द ही यहाँ भी स्वचालित ड्राइविंग परीक्षण शुरु की जाएगी।

जिस प्रकार दिल्ली सरकार ने इस नई प्रणाली की शुरुआत की है उसी तरह गाज़ियाबाद में भी यह प्रणाली शुरू होनी चाहिए। जिससे कि लाइसेंस केवल उन्ही लोगों को मिले जो इसके योग्य हों।

 

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