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एससी/एसटी एक्ट – कानून बदलना संसद की ज़िम्मेदारी, रिव्यू पिटीशन में कहा केंद्र सरकार ने

नई दिल्ली | एससी/एसटी एक्ट में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किए गए बदलाव के बाद केंद्र सरकार ने एक पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है। अपनी याचिका में सरकार ने कहा है कि जिस मुकदमे के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है, सरकार उसमें पार्टी नहीं थी। केंद्र ने कहा है कि यह कानून संसद ने बनाया था। केंद्र ने अपनी याचिका में कहा है कि कानून बनाना संसद का काम हैं। ज्ञात हो कि SC/ST एक्ट पुनर्विचार याचिका पर दो जजों की बेंच सुनवाई करेगी।

अपनी पुनर्विचार याचिका में केंद्र ने कहा- सरकार का मानना हैं कि सुप्रीम कोर्ट 3 तथ्यों के आधार पर ही कानून को रद्द कर सकती है और ये तीन तथ्य है, कि अगर मौलिक अधिकार का हनन हों, अगर कानून गलत बनाया गया हो और अगर किसी कानून को बनाने का अधिकार संसद के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता हो तो। इसके साथ ही सरकार की ये भी दलील है कि कोर्ट ये नहीं कह सकता है कि कानून का स्वरूप कैसा हो, क्योंकि कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है।

इसके साथ ही केंद्र ने यह भी दलील दी कि किसी भी कानून को सख़्त बनाने का अधिकार भी संसद के पास ही हैं। केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि समसामयिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कैसा कानून बने ये संसद या विधानसभा तय करती है।

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